कोलकाता , जनवरी 09 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष द्वारा 14 जुलाई तक स्थगित किए जाने के बाद मामले की तत्काल सुनवाई की ईडी की अपील को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति घोष द्वारा सुनवाई स्थगित किए जाने के बाद ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजय पाल के समक्ष याचिका दाखिल कर मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इसमें हस्तक्षेप से इनकार करते हुए तात्कालिक सुनवाई की अनुमति नहीं दी।

सूत्रों के अनुसार, ईडी ने पहले मौखिक रूप से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के समक्ष मामला उठाया था और अनुरोध किया था कि यदि न्यायमूर्ति घोष के समक्ष सुनवाई संभव न हो, तो मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को शीघ्र सुनवाई के लिए स्थानांतरित किया जाए। इसके बाद ईडी को लिखित अनुरोध देने को कहा गया।

इसके तहत केंद्रीय एजेंसी ने विशेष पीठ के गठन की मांग करते हुए एक लिखित याचिका दायर की, लेकिन इसे भी खारिज कर दिया गया। इस घटनाक्रम से जुड़े वकीलों का मानना है कि चूंकि मामले को स्थगित करने का एक न्यायिक आदेश पहले ही पारित हो चुका था, इसलिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने हस्तक्षेप न करना ही उचित समझा।

इसके परिणामस्वरूप, मामले की सुनवाई अब तय कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई को ही होगी। ईडी ने इससे पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आई-पैक कार्यालय में की गई जांच में बाधा डाली गई।

यह मामला शुक्रवार दोपहर न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि, न्यायाधीश के अदालत में उपस्थित होने के बावजूद, कोर्टरूम में अत्यधिक भीड़ के कारण सुनवाई शुरू नहीं हो सकी। कार्यवाही संचालित न हो पाने के चलते न्यायमूर्ति घोष ने बिना सुनवाई किए ही अदालत छोड़ दिया और मामले को 14 जुलाई तक स्थगित कर दिया। इस फैसले से ईडी असंतुष्ट रहा।

यह विवाद गुरुवार सुबह कोलकाता में कथित अवैध कोयला तस्करी मामले से जुड़े ईडी के दो तलाशी अभियानों के बाद सामने आया। एक टीम ने साल्ट लेक के सेक्टर-पांच स्थित आई-पैक कार्यालय पर छापा मारा, जबकि दूसरी टीम ने आई-पैक के संस्थापक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास की तलाशी ली। आई-पैक एक राजनीतिक परामर्श संस्था है, जो तृणमूल कांग्रेस को सलाह देती है।

छापेमारी की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं दोनों स्थानों पर पहुंचीं। तलाशी के दौरान वे प्रतीक जैन के आवास और बाद में आई-पैक कार्यालय में गईं तथा वहां से फाइलें, दस्तावेज़ और लैपटॉप बाहर ले जाती देखी गईं।

इसके बाद ईडी ने अदालत का रुख करते हुए जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। एजेंसी का कहना है कि ये तलाशी अभियान केवल कोयला तस्करी मामले से जुड़े थे और इनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं था। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके काम में बाधा डालने के लिए संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग किया गया।

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