रांची , नवम्बर 06 -- झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा "रिजिनल कॉन्फ्रेंस ऑन मेडिकल मैनेजमेंट एट आईसीयू,सीसीयू ऑफ़ झारखंड" का सफल आयोजन रांची स्थित बीएनआर चाणक्य सभागार में किया गया।

इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य राज्य में आईसीयू और सीसीयू स्तर पर गंभीर रोगियों के उपचार प्रबंधन को मजबूत बनाना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. नेहा अरोड़ा, विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग, झारखंड सरकार ने की। इस अवसर पर अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड शशि प्रकाश झा, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, डीआईसी सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स के प्रो. डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य, एम्स भोपाल के डॉ. सौरभ सैगल (ऑनलाइन) सहित राज्य के सभी सिविल सर्जन और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। लगभग 250 से अधिक प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य है कि झारखंड के सभी जिलों में आईसीयू,सीसीयू सेवाएं प्रभावी और जवाबदेह बनें। उन्होंने कहा कि अब जिला अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर नहीं रहेंगे, बल्कि गंभीर मरीजों को स्थिर करने और प्राथमिक उपचार देने में सक्षम बनेंगे। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर ऐसा तंत्र विकसित करें जिससे हर मरीज को समय पर जीवन रक्षक चिकित्सा मिल सके।"राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि हर जिला अस्पताल में सशक्त आईसीयू और क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित हों। उन्होंने कहा -"संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत है प्रबंधन और उपयोग की दक्षता बढ़ाने की। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी मरीज सुविधा या वेंटिलेटर की कमी से अपनी जान न गंवाए।"अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज ने कार्यक्रम में अपने स्वागत संबोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अस्पतालों में चिकित्सा प्रबंधन हेतु स्पष्ट और मानकीकृत गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं। इसी क्रम में विभाग ने एक ड्राफ्ट एसओपी ( स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार किया है, जिस पर विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं।

डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य (रिम्स, रांची) ने कहा कि राज्य में क्रिटिकल केयर नेटवर्क को मज़बूत बनाने के लिए एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि अगले 2 से 3 वर्षों में झारखंड को देश का मॉडल स्टेट बनाया जा सकता है।

सिद्धार्थ सान्याल, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं, ने कहा कि एक समान आईसीयू एडमिशन एंड डिस्चार्ज प्रोटोकॉल बनाना जरूरी है ताकि हर अस्पताल में मरीजों की देखभाल का एक मानक तय हो सके।

डॉ. सौरभ सैगल (एम्स भोपाल) - टेली-आईसीयू नेटवर्किंग और 24x7 विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रणाली पर जोर।

डॉ. बिक्रम गुप्ता (बीएचयू वाराणसी) - जनशक्ति सुदृढ़ीकरण और अवसंरचना विकास पर सुझाव।

डॉ. संजीव कुमार (आईजीआईएमएस, पटना) - एकीकृत ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर प्रोटोकॉल अपनाने की आवश्यकता पर बल।

डॉ. एस. के. सिंह - राज्य स्तरीय आईसीयू प्रबंधन सुधार हेतु समयबद्ध कार्ययोजना पर चर्चा।

सम्मेलन में विशेषज्ञों नेआईपीएचएस रिव्यू एवं एडमिशन क्राइटेरिया,मैनेजमेंट ऑफ क्रिटकली lll पेशेंट, स्टैंडर्डाइज्ड क्रिटिकल केयर और ट्रामा प्रोटोकॉल,सेफ डिस्चार्ज और ट्रांसफर प्रोटोकॉल, टैलीआईसीयू इंप्लीमेंटेशन, मैनपॉवर और ट्रेनिंग नीडेड निम्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

राज्य के पांच मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही आईसीयू की सुविधाएं उपलब्ध हैं, और सरकार सभी जिला अस्पतालों में इसे विस्तारित करने की दिशा में कार्यरत है।

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