शिमला , दिसंबर 26 -- हिमाचल प्रदेश में शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में मरीज के साथ मारपीट संबंधी वीडियों में दिखायी दे रहे डॉक्टर की सेवाएं समाप्त किए जाने के विरोध में शुक्रवार को सहकर्मी डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रही।

लगभग 3,000 डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों, इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने 24 दिसंबर को राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. राघव नरूला को नौकरी से निकालने का विरोध किया।

अस्पताल सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों के अवकाश पर चले जाने के कारण अस्पताल की नियमित सेवाएं ठप हो गईं और बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं में रुकावट आई और लगभग 200 तय ऑपरेशन टालने पड़े। केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रही।

सूत्रों ने कहा, "विरोध के कारण नियमित ड्यूटी का बहिष्कार किया गया, जिससे ओपीडी सेवाओं पर असर पड़ा और लगभग 200 तय ऑपरेशन टालने पड़े। अस्पताल में आंदोलन के बीच केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहीं।"आईजीएमसी के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की और डॉ. नरूला के बर्खास्तगी आदेश को तुरंत वापस लेने पर जोर दिया। आरडीए के अध्यक्ष डॉ. सोहेल शर्मा ने कहा कि इस मामले पर मुख्यमंत्री से बात हुई और डॉक्टरों ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर 22 दिसंबर की घटना के दौरान डॉक्टरों को अपनी ड्यूटी करने से रोका था।

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की सुरक्षा को सुनिश्चत करने के लिए नयी और मजबूत गाइडलाइंस बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे की रणनीति तय करने के लिए एसोसिएशन शिमला, टांडा और हमीरपुर के आरडीए की एक बैठक आज दिन में बाद में होगी।

इस बीच, मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य विभाग नये सामने आये तथ्यों को देखते हुए नयी जांच करेगा। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अगर मरीज या अटेंडेंट जिम्मेदार पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई होगी। डॉ. नरूला के समर्थन में उनके पैतृक शहर पोंटा साहिब में स्थानीय व्यापार मंडल के बंद के आह्वान पर दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

पोंटा साहिब में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व स्थानीय भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने किया। पोंटा साहिब में होम्योपैथिक क्लिनिक चलाने वाले पार्षद डॉ. रोहताश नांगिया ने कहा कि विरोध के तौर पर शहर की दुकानें दोपहर 1:00 बजे तक बंद रहीं। उन्होंने कहा कि लगभग 500 लोग, पार्टी लाइन से ऊपर उठकर, विरोध में शामिल हुए।

डॉ नांगिया ने भी एक वीडियो जारी कर दावा किया कि मरीज़ अर्जुन सिंह के खिलाफ 26 जून, 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पहलू किसी भी निष्पक्ष जांच का हिस्सा होना चाहिए। बंद शांतिपूर्ण रहा, हालांकि शहर में तनाव बना रहा।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार डॉ. राघव की बर्खास्तगी वापस नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ हो जाएगा और शायद पोंटा साहिब से आगे भी फैल सकता है। इस बीच, डॉ. नरूला की मां ने सोशल मीडिया पर एकतरफा फैसले पर गुस्सा दिखाते हुए और निष्पक्ष जांच की मांग की। डॉक्टरों ने संकेत दिया है कि अगर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की गई तो विरोध बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि 22 दिसंबर को डॉ. नरूला और मरीज अर्जुन के बीच मारपीट का एक वायरल वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों ने मरीज के पक्ष में अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

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