कोलकाता , जनवरी 21 -- इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वाम मोर्चा, कांग्रेस और आईएसएफ के बीच तत्काल गठबंधन का आह्वान किया।
आईएसएफ ने तर्क दिया कि केवल ऐसा गठबंधन ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'दो ध्रुवों वाली राजनीति' को प्रभावी तरीके से चुनौती दे सकता है।
संगठन के प्रमुख और भांगड़ के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आईएसएफ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि वाम मोर्चा और कांग्रेस के साथ बातचीत पहले से ही चल रही है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन को इसी महीने के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर वामपंथी, कांग्रेस और आईएसएफ एक साथ आते हैं, तो तृणमूल और भाजपा की संयुक्त राजनीति को हराया जा सकता है और इसे समाप्त किया जा सकता है।"कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने श्री सिद्दीकी के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकारों से कहा कि भाजपा और तृणमूल के बाहर की सभी राजनीतिक ताकतों को धर्म के इर्द-गिर्द केंद्रित 'विनाशकारी राजनीति' को रोकने के लिए एक साथ आना चाहिए।
श्री सिद्दीकी आरोप लगाया कि टीएमसी और भाजपा दोनों ही मंदिरों और मस्जिदों से संबंधित मुद्दों को उजागर करके मतदाताओं के बीच ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं और अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान से संबंधित मामलों को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।
विधायक ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर वैध दस्तावेज रखने वाले वास्तविक निवासियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "एसआईआर अभ्यास के दौरान किसी भी वास्तविक नागरिक को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यह प्रक्रिया उन अल्पसंख्यक समुदायों को असमान रूप से प्रभावित कर रही है जो पीढ़ियों से राज्य में रह रहे हैं।
श्री सिद्दीकी ने दावा किया कि सामान्य मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है और उनसे अनावश्यक रूप से दस्तावेज जमा करने को कहा जा रहा है, जिससे मतदाताओं में डर पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, "एसआईआर के नाम पर लोगों को आतंकित करने की कोशिश की जा रही है। हम पुनरीक्षण अभ्यास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा के उकसावे पर चुनाव आयोग द्वारा इसके जल्दबाजी और असंगत कार्यान्वयन के खिलाफ हैं।" उन्होंने कहा कि अगर कथित उत्पीड़न जारी रहा तो आईएसएफ विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा।
विधायक ने अल्पसंख्यक कल्याण पर तृणमूल पर 'दोहरी बात' करने का आरोप लगाया और दावा किया कि सभी वास्तविक दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में 'बंगाली भाषी प्रवासियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और हमलों' की भी आलोचना की और केंद्र तथा राज्य सरकारों से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।
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