मॉस्को , मार्च 29 -- ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने तेहरान में एक विश्वविद्यालय पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में इजरायली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को हमलों के लिए वैध लक्ष्य मानना शुरू कर दिया है।
प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। चैनल ने टेलीग्राम पर बताया कि तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी और इजरायली विश्वविद्यालय वैध लक्ष्य हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: "इस्फ़ाहान यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी और तेहरान स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, उन कई विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों में से केवल दो हैं, जिन पर पिछले 30 दिनों के दौरान ईरानी राष्ट्र के खिलाफ छेड़े गए अपने अवैध युद्ध के दौरान हमलावरों ने जानबूझकर हमले किए हैं।"उन्होंने आगे कहा, "वास्तव में, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता का असली मकसद लगातार सामने आ रहा है: विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों, ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख वैज्ञानिकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाकर हमारे देश की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को पंगु बनाना है।"उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का यह दावा कि वह "ईरान के 'परमाणु कार्यक्रम' और 'आसन्न खतरे' का मुकाबला कर रहा है," सिवाय दुर्भावनापूर्ण बहानों के और कुछ नहीं है -- ये केवल मनगढ़ंत बातें हैं जिनका मकसद उनके असली इरादों को छिपाना है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में विभिन्न लक्ष्यों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ।इसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र में सैन्य लक्ष्यों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।
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