चेन्नई , मार्च 14 -- भारतीय अंतरिक्ष सगठन (इसरो) ने कहा है कि मार्च 2016 में लॉन्च किए गए आईआरएएसएस-1एफ उपग्रह ने अपनी 10 साल की तय मिशन अवधि पूरी कर ली है।
इसरो ने शनिवार को बताया कि इस अंतरिक्ष यान ने 10 मार्च 2026 को अपनी दस साल की मिशन अवधि पूरी कर ली। इसरो के मुताबिक शुक्रवार (13 मार्च 2026) को, इसमें लगी ऑन-बोर्ड एटॉमिक घड़ी ने काम करना बंद कर दिया। हालांकि, यह सैटेलाइट कक्षा में रहते हुए समाज के लिए उपयोगी विभिन्न कार्यों, जैसे एकतरफा ब्रॉडकास्ट मैसेजिंग सेवाएं देने का काम जारी रखेगा।
गौरतलब है कि इसरो के भरोसेमंद और मुख्य लॉन्च व्हीकल पीएलएसवी-सी 32 ने 11 मार्च 2016 को अपनी 34वीं उड़ान में आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) के छठे उपग्रह का प्रक्षेपण किया था, जिसका वजह 1,425 किलोग्राम था। यह पीएसएलवी का लगातार 33वां सफल मिशन था और इसकी 'एक्सएल' विन्यास में बारहवां मिशन था।
दूसरे लॉन्च पैड से 16.01 बजे (शाम 4:01 बजे) पीएसएलवी-सी32 के उड़ान भरने के बाद 19 मिनट 34 सेकंड की उड़ान अवधि के बाद आरआईएनएसएस -1 एफ उपग्रह को 284 किमी X 20,719 किमी की एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया। यह कक्षा भूमध्य रेखा से 17.866 डिग्री के कोण पर झुकी हुई थी (जो कि इसकी तय कक्षा के बहुत करीब थी) और यह सफलतापूर्वक पीएसएलवी के चौथे चरण से अलग हो गया। अलग होने के बाद आईआरएनएसएस -1एफ के सोलर पैनल अपने आप खुल गए।
इसरो की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (एसीएफ, हासन, कर्नाटक में स्थित) ने सैटेलाइट का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। आने वाले दिनों में एमसीएफ से चार ऑर्बिट मैन्युवर (कक्षा समायोजन) किए जाएंगे ताकि सैटेलाइट को 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित जियोस्टेशनरी कक्षा में स्थापित किया जा सके।
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