चेन्नई , नवंबर 17 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आईआईटी-एम) ने भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी)के साथ साझेदारी में सोमवार को देश की पहली 'एकल-कोशिका ओमिक्स ट्रांसलेशनल (एससीओटी) शोध प्रयोगशाला' का शुभारंभ किया।
आईआईटी-मद्रास परिसर में आज शुरू हुयी यह प्रयोगशाला भारत के स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक अग्रणी कदम है। इस पहल का उद्देश्य जन स्वास्थ्य प्रगति के लिए इंजीनियरिंग एवं चिकित्सा को एकीकृत करना है। आईआरएफसी ने इस प्रयोगशाला के माध्यम से अत्याधुनिक एकल-कोशिका शोध के माध्यम से सटीक स्वास्थ्य सेवा, औषधि खोज एवं चिकित्सा कौशल विकास को आगे बढ़ाने के लिए आईआईटी मद्रास को 10.83 करोड़ रुपये की सीएसआर अनुदान राशि मंजूर की है।
अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित एससीओटी प्रयोगशाला कैंसर, हृदय वाहिका, संक्रमण, सूजन, मेटाबॉलिक और अन्य गैर-संचारी रोगों सहित विभिन्न रोगों का शीघ्र निदान, रोग निदान, बायोमार्कर खोज एवं दवा स्क्रीनिंग की सुविधा प्रदान करेगी। आईआईटी-मद्रास के चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में स्थित इस प्रयोगशाला को एकल-कोशिका जीव विज्ञान, औषधि खोज, बायोमार्कर पहचान और स्वास्थ्य सेवा नवाचार में शोध में तेजी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस सुविधा का शुभारंभ आईआईटी-मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि, रेल मंत्रालय की सदस्य (वित्त) सुश्री उषा वेणुगोपाल, आईआरएफसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे और अन्य हितधारकों की उपस्थिति में किया गया।
स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 'मेक इन इंडिया' को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए प्रोफेसर कामकोटि ने कहा " आईआरएफसी के साथ हमारा सहयोग औषधि खोज एवं सटीक चिकित्सा में भारत की यात्रा को गति देने में एक महत्वपूर्ण कदम है।आईआईटी मद्रास इंजीनियरिंग एवं चिकित्सा विज्ञान को एकीकृत करने में अग्रणी रहा है और यह अत्याधुनिक एससीओटी शोध प्रयोगशाला प्रारंभिक निदान, लक्षित चिकित्सा और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य देखभाल नवाचार में भारत की क्षमता को बहुत बढ़ावा देगी।"सुश्री उषा वेणुगोपाल ने कहा, "एससीओटी शोध प्रयोगशाला का उद्घाटन चिकित्सा अनुसंधान में मज़बूत क्षमताओं के निर्माण की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। आईआरएफसी की सीएसआर अनुदान सहायता उन अध्ययनों में सहायक होगी जिनमें शीघ्र निदान में सुधार एवं बेहतर उपचार विकसित करने की क्षमता है। यह सहयोग दर्शाता है कि कैसे संस्थान बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं। मुझे आशा है कि यह सुविधा आने वाले वर्षों में ज्ञान, नवाचार एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देगी।"आईआरएफसी और आईआईटी मद्रास के बीच यह सहयोग कोशिकीय स्तर पर रोगों का पता लगाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है जो व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों और अगली पीढ़ी के उपचारों का मार्ग प्रशस्त करता है।
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