वाराणसी , दिसंबर 03 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग द्वारा 2-3 दिसंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "ड्रग डिस्कवरी एंड ट्रांसलेशनल हेल्थकेयर (डीडीटीएच-2025)" का सफल आयोजन किया गया।
यह सम्मेलन बायोइन्फॉर्मेटिक्स एंड ड्रग डिस्कवरी सोसाइटी (बीआईडीडीएस) तथा बायोकेमिकल इंजीनियरिंग सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन में ड्रग डिस्कवरी एवं ट्रांसलेशनल हेल्थकेयर के नवीनतम आयामों पर गहन चर्चा हुई। प्रमुख विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ड्रग डिजाइन, थेराप्यूटिक प्रोटीन, नए ड्रग टार्गेट्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी शामिल रहे।
प्रतिष्ठित प्रो. एम. विजयन स्मृति व्याख्यान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के प्रख्यात जैवप्रौद्योगिकी शोधकर्ता प्रो. तेज पी. सिंह ने दिया। इस अवसर पर आईआईआईटी दिल्ली के प्रो. जी. पी. एस. राघवन को बीआईडीडीएस का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राकेश भटनागर तथा इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (आईसीजीईबी), नई दिल्ली के प्रो. दिनाकर एम. सालुंके ने रोग प्रबंधन के लिए इम्यूनोलॉजिकल दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज के निदेशक प्रो. रामा शंकर वर्मा ने जैव-उपकरण क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' एवं 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन में देशभर से 250 से अधिक प्रतिभागी एवं 38 आमंत्रित वक्ता शामिल हुए। इसके अलावा 140 से अधिक पोस्टर प्रस्तुत किए गए, जिनमें से छह सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को पुरस्कृत किया गया।
आयोजन में जैवप्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), नेशनल रिसर्च फाउंडेशन तथा केमिकल एब्स्ट्रैक्ट्स सर्विस (कैस) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजन समिति ने उद्योग प्रायोजकों न्यूमोल और एडवेंट इन्फॉर्मेटिक्स प्रा. लि. के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
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