चेन्नई , जनवरी 03 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की योजना श्रीहरिकोटा और उसके आसपास अगली पीढ़ी का बड़ा रॉकेट बनाने की है। इस कारण आंध्र प्रदेश को अंतरिक्ष क्षेत्र के निवेशकों से बड़ा निवेश आकर्षित करने की उम्मीद है।

आंध्र प्रदेश सरकार के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सलाहकार डॉ. एस. सोमनाथ ने शनिवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में यह उम्मीद जतायी। डॉ. एस. सोमनाथ पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग और इसरो के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

श्री सोमनाथ ने बताया कि इसरो ने एक ऐसा रॉकेट बनाने का निर्णय लिया है जो 30 टन के उपग्रह को निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में ले जा सके। रॉकेट का प्रक्षेपण भार करीब 1,000 टन होगा और इसकी ऊंचाई लगभग 105 मीटर होगी। अपने बड़े आकार के कारण, रॉकेट के घटक और अन्य प्रणालियों को सड़क से लंबी दूरी तक नहीं ले जाया जा सकेगा, इसलिए इन्हें श्रीहरिकोटा के पास बनाना होगा। भारत का रॉकेट प्रक्षेपण स्थल श्रीहरिकोटा में है।

अगली पीढ़ी के प्रस्तावित प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) के लिए जारी किये गये बड़े घटकों के कुछ निविदाओं में पहले ही यह शर्त रखी गयी है कि डिलीवरी श्रीहरिकोटा में होनी चाहिए। इसके अलावा, एनजीएलवी के लिए श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्च पैड बनाया जा रहा है, क्योंकि बाकी दो लॉन्च पैड इस आकार के रॉकेट को संभाल नहीं सकते।

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