विजयवाड़ा , फरवरी 09 -- देश की अग्रणी विविधीकृत कृषि-व्यवसाय कंपनी गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने सोमवार को धान की फसल के लिए विकसित नया कीटनाशक 'तकाई' लॉन्च किया। यह उत्पाद आईएसके जापान द्वारा विकसित साइक्लाप्रिन टीएम तकनीक से संचालित है।
कंपनी के अनुसार, तकाई धान की प्रमुख कीट समस्याओं-स्टेम बोरर (तना छेदक) और लीफ फोल्डर के नियंत्रण में प्रभावी है। इसे रोपाई (डीएटी) के 15-30 दिन बाद 160 मिली की मात्रा में और पुनः 40-60 डीएटी के बीच उपयोग करने की सिफारिश की गई है, जिससे फसल को लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है। कंपनी मक्का, मिर्च, पत्ता गोभी, सोयाबीन, चना और गन्ना फसलों में भी इसके लेबल अनुमोदन की प्रक्रिया में है।
इस अवसर पर गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ सुनील कटारिया ने कहा, ''प्रभावी कीट प्रबंधन भारतीय धान किसानों की सफलता की कुंजी है। तकाई के माध्यम से हम किसानों को ऐसा समाधान देना चाहते हैं, जो कीटों पर त्वरित नियंत्रण और लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान कर फसल के स्वास्थ्य में सुधार करे।'' उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य पर्यावरणीय और बाजार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए बेहतर फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराना है।
कंपनी के अनुसार, स्टेम बोरर (तना छेदक) के गंभीर प्रकोप से 30-40 प्रतिशत तक उपज हानि हो सकती है, जबकि लीफ फोल्डर 20-30 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है। ये कीट शुरुआती और मध्य विकास चरण में हमला करते हैं, जब पहचान और समय पर नियंत्रण चुनौतीपूर्ण होता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है, जहां 150.18 मिलियन टन उत्पादन होता है, लेकिन प्रति हेक्टेयर औसत उपज लगभग 2.9 टन है, जो वैश्विक सर्वोत्तम 5 टन प्रति हेक्टेयर की तुलना में काफी कम है।
प्रजनन चरण (40-60 डीएटी) में भी दोनों कीट सक्रिय रहते हैं। स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर पौधों पर हमला करते हैं । लीफ फोल्डर पत्तियों के ऊतक खाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण क्षेत्र घटता है और फसल वृद्धि प्रभावित होती है। ऐसे चरणों में तकाई का निर्धारित मात्रा में उपयोग लाभकारी बताया गया है।
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