रामनगर/कालाढुंगी/16मार्च (वार्ता) उत्तराखंड में रामनगर और कालाढुंगी विधानसभा के छोई, कमोल,गैबुआ,पिरूमदारा, कानिया ढेला आदि क्षेत्रों में देर रात आई आंधी-तूफान से गेहूं की फसल बर्बाद हो गयी है, किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
बता दें कि देर रात आए तेज आंधी-तूफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया,कल रात आये तेज आंधी तूफान के कारण कई खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर लेट गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है,फसल के बर्बाद होने से किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
वहीं स्थानीय किसान नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार उन्होंने अपने खेतों में काफी मेहनत और खर्च के साथ गेहूं की फसल तैयार की थी, लेकिन देर रात आए तेज आंधी तूफान ने पूरी फसल को बर्बाद कर दिया,तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है। किसान नरेंद्र सिंह ने बताया कि कल आये तूफान से केवल उनकी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई किसानों की फसल भी इस तूफान की चपेट में आकर कई एकड़ गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो गयी है।
क्षेत्र में कई एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर लेट गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के अंतिम समय में आई इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
किसान नरेंद्र सिंह ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर किसानों को आर्थिक सहायता नहीं मिली तो कई किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है और इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से उन्हें हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में सरकार को किसानों की मदद के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों को इस संकट से राहत मिल सके और उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
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