शिलांग , मार्च 27 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार ने अस्थायी और घाटा अनुदान के ज़रिए 4,500 से ज़्यादा शिक्षण संस्थानों को मदद देने के लिए हर साल लगभग 1,200 करोड़ रुपये खर्च किये हैं।
श्री संगमा ने यह बात शिलांग के सिनोड कॉलेज के डायमंड जुबली समारोह और जाइव के छात्र मैदान में कॉलेज वीक 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि घाटा अनुदान प्रणाली के तहत शिक्षकों की सैलरी पर हर साल लगभग 120 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सिनोड कॉलेज भी इन लाभार्थी संस्थानों में से एक है। उन्होंने कहा, "मेघालय पूर्वोत्तर राज्यों में से एक ऐसा राज्य है जो बड़ी संख्या में संस्थानों को मदद देने के अपने लगातार प्रयासों के लिए जाना जाता है।" इस दौरान उ्न्होंने सरकार की ओर से शिक्षण संस्थानों लगातार मदद का आश्वासन भी दिला।
शिक्षा के महत्व पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समाज और एक सरकार के तौर पर हम जो सबसे बड़ा निवेश कर सकते हैं, वह मानव पूंजी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे समाज को बदलने और हमारे राज्य को आगे ले जाने का सबसे शक्तिशाली साधन बनी हुई है। श्री संगमा ने शिक्षा सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को स्वीकार किया और इसके सदस्यों के योगदान की सराहना की। युवाओं को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता उल्लेख किया और कहा कि लगभग 50 प्रतिशत आबादी 20 वर्ष से कम आयु की है, जो लगभग 18 लाख युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने इसे एक अवसर और एक चुनौती दोनों बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि सही मार्गदर्शन मिलने पर, युवा राज्य की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित