अगरतला , अप्रैल 03 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्य में अवैध प्रवास के मुद्दे पर तीन महीने के भीतर एक व्यापक रिपोर्ट पेश करे।
टिपरा मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा के नेतृत्व वाले एक समूह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति विश्वजीत पालित की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने सरकार से उन कदमों का विवरण मांगा है जिनको याचिका में उठाया गया है।
याचिका में गृह मंत्रालय के उस निर्देश का हवाला दिया गया है, जिसमें 25 मार्च, 1971 (बंगलादेश मुक्ति संग्राम से जुड़ी तारीख) के बाद भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने का आदेश दिया गया है। नियम के अनुसार, इस तारीख के बाद अवैध रूप से आने वाले लोग 'अवैध प्रवासी' माने जाते हैं और वे निर्वासन के पात्र हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित