रांची , जनवरी 08 -- झारखंड में अवैध अफीम की खेती और मादक पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से गुरुवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र ने की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में राज्य के उन जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए, जो अवैध अफीम की खेती से सर्वाधिक प्रभावित माने जाते हैं।
इस बैठक में रांची, चतरा, पलामू, चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम), हजारीबाग, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और खूंटी जिले के एसपी जुड़े और अपने-अपने जिलों में की गई कार्रवाई, उपलब्धियों और चुनौतियों की विस्तृत जानकारी दी।
समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में किए गए अफीम विनष्टीकरण के आंकड़ों, फसलीय वर्ष 2024-25 में विनष्ट की गई भूमि के जीआर सत्यापन की स्थिति, एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज कांडों की अद्यतन प्रगति, बड़े तस्करों और नेटवर्क संचालकों पर की गई कार्रवाई, पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत भेजे गए प्रस्तावों, तथा जागरूकता अभियान और वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के बाद डीजीपी तदाशा मिश्र ने अवैध अफीम की खेती के पूर्ण विनाश पर विशेष जोर देते हुए पुलिस अधिकारियों को कई अहम और बिंदुवार निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि केवल खेत नष्ट करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को तोड़ना जरूरी है। इसके लिए एनडीपीएस मामलों में आगे-पीछे के लिंक स्थापित कर संगठित तस्करों तक पहुंचने, अंतर-जिला एवं अंतर-राज्यीय समन्वय के साथ संयुक्त कार्रवाई करने और तकनीक का अधिकतम उपयोग करने का निर्देश दिया गया।
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