, March 10 -- कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि अध्यक्ष जैसी संस्था को मजबूत करने के लिए है। उनका कहना था कि संविधान में दो सदस्यों, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लोकसभा की कार्यवाही के संचालन के लिए चयन का अधिकार है। उनका कहना था कि संविधान सभा में स्पष्ट कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा नहीं देंगे और यदि देंगे तो यह कार्यपालिका के अधीन माना जाएगा। अध्यक्ष को संवैधानिक दर्जा दिया गया है लेकिन इस सरकार ने संविधान की मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ किया है और उसने कोई उपाध्यक्ष सदन को नहीं दिया है।
उन्होंने संविधान में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को कोई ज्यादा महत्व नहीं दिया है लेकिन उसके ठीक विपरीत सदन के सदस्य को बहुत महत्व दिया गया है और इसके कारण सदस्यों के संवैधानिक अधिकार को कम नहीं किया जा सकता है। यह संविधान प्रदत्त अधिकार सदस्यों को प्रदान हैं। संविधान ने सांसदों को जो अधिकार दिये गये हैं उनको कुचला नहीं जा सकता और सदस्य सदन में जो कहता है उसे न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती। संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी है और उस पर कोई रोक नहीं लगा सकता है। उनका कहना था कि संसद सदस्यों को व्यापक अधिकार दिये गये हैं और उन्हें कोई कम नहीं कर सकता है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात कहनी शुरु की थी तो वह एक पत्रिका में प्रकाशित उद्धरण दे रहे थे। उस आलेख को पत्रिका ने वापस नहीं लिया है इसलिए श्री गांधी को उस पत्रिका का उद्धरण पेश करने से रोकना अनुचित था। पत्रिका में छपे अंशों को ही पढकर सुनाया जा रहा था। इसमें किताब नहीं छपी होने की बात काल्पनिक है। विपक्ष के नेता को अनुमति नहीं देना बोलने की आजादी पर अंकुश है।
भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्षी कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री को उल्टा सीधा बोलते हैं लेकिन इस पर कोई कुछ नहीं कहता। उन्होंने कांग्रेस पर हमला किया और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कई गलतियां की थीं और उसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं को सत्ता में नहीं होने की छटपटाहट है और विपक्ष के नेता राहुल गांधी में वही छटपटाहट है। वह गंभीर नहीं हैं और जिस मुद्दे पर बोलते हैं उसके समाधान के लिए आगे नहीं बढ़ते हैं। श्री गांधी सदन में सिर्फ बोलते हैं और चले जाते हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बचाव किया और कहा कि उन्हेंने कभी किसी के साथ अन्याय नहीं किया है यह बात वह जानते हैं।
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