प्रयागराज , जनवरी 22 -- प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच संत समाज दो तरफ में बंट गया है। एक धड़ा अविमुक्तेश्वरानंद को सही बता रहा है, तो दूसरा गलत कह रहा है। गुरुवार को कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महराज ने कहा प्रशासन ने गलती तो की है। ब्राह्मणों को व साधुओं को चोटी पकड़कर मारा है। प्रशासन माफी क्यों नहीं मांग ले रहा है। वहीं रविंद्र पुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपशब्द कहने वाला संत नहीं हो सकता।द्वारका के शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का कहना है कि प्रशासन शिखा का अर्थ नहीं मानता है। शिखा जो होती है, उसमें ब्रह्मा का वास होता होता है। गंगा स्नान करने के लिए शंकराचार्य और बटुक ब्राह्मणों को पीटा गया, यह गलत है। यह शासन का अहंकार है। कभी अपनी सत्ता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। गंगा स्नान करने से रोकने वालों को गोहत्या का पाप लगता है। यह शास्त्र का वचन है। इसलिए ऐसा काम नहीं करना चाहिए। अगर हमें कोई बल मिला है, तो उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हम प्रशासन के इस कृत्य की घोर निंदा करते हैं।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महराज ने कहा प्रशासन ने गलती तो की है। ब्राह्मणों और साधुओं को चोटी पकड़कर मारा। प्रशासन माफी क्यों नहीं मांग ले रहा। माफी मांगने में इतनी देरी क्यों हो रही है। संत तो दयावान होते हैं, तुरंत माफ कर देंगे।क्षमा मांग लेने में आखिर प्रशासन को किस बात की अकड़ है। यह अधिकार आपको किसने दिया है कि किसी का चोटी पकड़कर आप मारेंगे। क्या यह अधिकार आपको संविधान ने दिया है। संतों के चरणों में जाइए, गलती हुई तो माफी मांगिए। प्रशासन को लंबा नहीं खींचना चाहिए। उनके निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय तक मान्यता देता है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने मुख्यमंत्री को अकबर और हुमायूं का बेटा बताए जाने पर कहा कि यह एक संत की भाषा नहीं हो सकती। उन्हें कोई शिकायत थी, तो मुख्यमंत्री से शिकायत करते या कोर्ट जाते। वह सीधे मुख्यमंत्री पर क्यों निशाना साध रहे।हम संत समाज इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

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