नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कहा है कि उसे अल्पसंख्यकों पर बढ़ते सांप्रदायिक हमलों से सख्ती और शीघ्रता से निपटना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां साप्ताहिक ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में कहा ," व्यक्तिगत रंजिश, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों" से जोड़ने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है, जो अपराधियों को और अधिक प्रोत्साहित करती है।"प्रवक्ता ने कहा ," हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा किए जा रहे बार-बार के हमलों के एक चिंताजनक पैटर्न को लगातार देख रहे हैं।"उन्होंने कहा कि ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती और शीघ्रता से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को व्यक्तिगत रंजिश, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देखी गयी है।

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने आगामी संसदीय चुनाव से पहले बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा की तीव्रता को लेकर गहरा आक्रोश, चिंता और कड़ी निंदा व्यक्त की है।

परिषद ने कहा कि बांग्लादेश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को देखते हुए देश भर के अल्पसंख्यक समुदाय भय और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।

परिषद के अनुसार, आगामी संसदीय चुनाव में अल्पसंख्यक पहले से ही इस बात को लेकर आशंकित हैं कि वे बिना किसी बाधा के और स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे या नहीं। परिषद ने कहा कि सांप्रदायिक तत्व फरवरी में होने वाले चुनाव में अल्पसंख्यकों को उनके पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट देने से रोकने के उद्देश्य से देशव्यापी रूप से इन जघन्य कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। परिषद ने यूनुस सरकार और चुनाव आयोग से इन घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

परिषद ने दिसंबर 2025 में ही अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की 51 घटनाओं की सूची जारी की है, जिनमें 10 हत्याएं, चोरी और डकैती की 10 घटनाएं, घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मंदिरों और भूमि पर जबरन कब्जा, लूटपाट और आगजनी से जुड़ी 23 घटनाएं, धार्मिक निंदा और रॉ का एजेंट होने के झूठे आरोपों में चार मामलों में हिरासत और यातना, एक बलात्कार का प्रयास और शारीरिक हमले की तीन घटनाएं शामिल हैं।

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