नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दिवंगत नेता एवं सांसद अरुण जेटली को "एक सच्चा नेता और समस्याओं को सुलझाने में माहिर" शख्स बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एडवोकेट सुमंत बत्रा द्व्रारा रचित श्री जेटली की जीवनी 'द लाइफ एंड लीगेसी ऑफ अरुण जेटली' के विमोचन समारोह में ये उद्गार व्यक्त किए।
इस गरिमामय कार्यक्रम में श्री नायडू ने श्री जेटली की राजनीतिक सूझबूझ को याद करते हुए बताया कि वह कैसे पार्टी के सदस्य जटिल आर्थिक और संवैधानिक मुद्दों पर मार्गदर्शन के लिए हमेशा उनकी ओर देखते थे।
श्री नायडू ने देश के ऐतिहासिक सुधार 'जीएसटी बिल' पर आम सहमति बनाने में श्री जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने एक किस्सा साझा किया जिसमें श्री जेटली ने उनके एवं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के बीच बैठक कराकर गतिरोध को दूर करने में मदद की थी।
श्री नायडू ने कहा, "यह क्षण जेटली की विभाजन को पाटने और राजनीतिक चुनौतियों को सहजता से पार करने की अद्वितीय क्षमता को दर्शाता है।" उन्होंने सार्वजनिक जीवन में घटती शिष्टता पर चिंता जताते हुए कहा कि श्री जेटली एक ऐसे आदर्श राजनेता थे जिनका अनुसरण किया जाना चाहिए।
समारोह में अरुण जेटली की पत्नी संगीता जेटली, पुत्र रोहन जेटली और पुत्री सोनाली जेटली के साथ-साथ राजनीति, न्यायपालिका और कानून जगत की दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें पूर्व न्यायाधीश जस्टिस ए.के. सीकरी, जस्टिस अरुण मिश्रा, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत शामिल थे।
श्री अभिषेक मनु सिंघवी ने श्री जेटली को "राजनीति का सज्जन पुरुष" और "सेंट्रल हॉल का प्रतीक" बताया, जो संवाद और भाईचारे के युग का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने जेटली की वाकपटुता और जम्मू-कश्मीर जैसे जटिल मुद्दों पर उनकी पकड़ की सराहना की। वहीं, जस्टिस ए.के. सीकरी ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के दिनों को याद करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान जेल में बिताए समय ने श्री जेटली को और अधिक दृढ़ बना दिया था।
वक्ताओं ने दिवंगत जेटली की असाधारण उदारता के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। इसमें बताया गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय की कैंटीन अक्सर एक अनौपचारिक कक्षा में बदल जाती थी, जहां दर्जनों युवा वकील उन्हें कानून और राजनीति पर चर्चा करते हुए सुनते थे। उन्होंने अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए फंड बनाया और उनके बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की।
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