नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- अरुणाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए मंगलवार को एक नये अभियान की शुरुआत की जिसे 'टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल' नाम दिया गया है।
अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पसांग दोरजी सोना ने यहां अरुणाचल भवन में इस अभियान की शुरुआत की। अभियान के वीडियो में छह गंतव्यों तवांग, जीरो, अनिनी, नामसाई, डोंग और मेचुका के मनोरम दृश्यों और वहां पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को दिखाया गया है।
श्री सांग ने 'यूनीवार्ता' के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि अरुणाचल सबसे अलग राज्य है। उन्होंने कहा, "बहुत से गंतव्यों पर एक ही तरह का पर्यटन उपलब्ध होता है। अरुणाचल में एडवेंचर से जुड़ा पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और आरोग्य से जुड़ा पर्यटन सब एक साथ उपलब्ध है। वहां उष्णकटिबंधीय वन, एल्पाइन और हिमाच्छादित पर्वत भी मिलेंगे। इस समय कहीं बहुत अधिक हिमपात हो रहा है तो कहीं बहुत ही सुहावना मौसम है। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अरुणाचल में सांस्कृतिक विविधता भी सबसे अधिक है।"उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी से पहले साल 2019 में अरुणाचल प्रदेश में 5.66 लाख घरेलू पर्यटक आये थे। यह संख्या साल 2023 में बढ़कर 10.45 लाख पर पहुंच गयी। साल 2024 में यह 9.83 लाख रही और 2025 में भी 10 लाख से ऊपर रहने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि अरुणाचल में आध्यात्मिक पर्यटन और एडवेंचर पर्यटन काफी लोकप्रिय है। राज्य में पांच नदियां हैं। यहां राफ्टिंग और ट्रेकिंग लोगों को खूब भाते हैं। अभी राज्य में एडवेंचर रेसिंग और माउंटेन बाइकिंग की भी शुरुआत की गयी है।
मंत्री ने बताया कि अभी गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से ज्यादा पर्यटक आ रहे हैं। दूसरे राज्यों से लोगों को आकर्षित करने के प्रयास चल रहे हैं। दिल्ली में और बेंगलुरु में रोड शो भी किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश काफी बड़ा राज्य है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण अपनी चुनौतियां हैं। सड़कें काफी अच्छी हैं, लेकिन फिर भी एक जगह से दूसरी जगह जाने में समय लगता है। पर्यटक एक सप्ताह में भी राज्य के सभी पर्यटक स्थलों को नहीं देख सकते।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और कोलकाता से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए हवाई संपर्क काफी अच्छा है। मुंबई और बेंगलुरु से संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता है।
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