ईटानगर , जनवरी 10 -- राज्य की जैव विविधता रिकॉर्ड में बड़ी बढ़ोतरी करते हुए अरुणाचल प्रदेश से पहली बार एक छोटे सैप्रोफाइटिक मशरूम का पता चला है, जिसे पैरासोला प्लिकैटिलिस (कर्टिस) रेडहेड, विल्गालिस और हॉपल के तौर पर पहचाना गया है। इसे आमतौर पर प्लीटेड इंककैप के नाम से जाना जाता है।

यह मशरूम लोंगडिंग के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)-कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रयोगात्मक खेत में देखा गया था।

इन नमूनों को सबसे पहले सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी (पशु विज्ञान) टिलिंग टायो ने देखा और इकट्ठा किया। फील्ड पर्यवेक्षण और फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण को बाद में सब्जेक्ट मैटर विशेषज्ञ (प्लांट पैथोलॉजी) दीप नारायण मिश्रा को संप्रेषित किया गया, जिन्होंने खास मॉर्फोलॉजिकल फीचर जैसे मजबूत प्लीटेड ग्रे कैप, पतला और नाजुक डंठल, और नॉन-डिलीक्वेसेंट गिल्स के आधार पर प्रजाति की जानकारी दी।

पैरासोला प्लिकैटिलिस एक सैप्रोट्रोफिक मशरूम है, जिसकी खासियत इसका बहुत नाजुक, कागज जितना पतला कैप और बहुत कम समय तक चलने वाला होना है। यह महज 24 घंटे से भी कम समय तक चलता है। हालांकि खाने लायक नहीं होता, न ही इसका कोई व्यावसायिक महत्व है, फिर भी यह प्रजाति पारिस्थितिकी में अहम भूमिका निभाती है।

एक्स्ट्रासेलुलर एंजाइम निकलने से पत्तियों के कूड़े और बचे हुए जैविक हिस्सों को गलाता है, जिससे पोषक तत्व खनिजीकरण, कार्बन चक्र और नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे जरूरी पोषक पौधों को मिलने में मदद मिलती है।

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