ईटानगर , फरवरी 07 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के.टी. परनायक ने शनिवार को सीमावर्ती सड़क बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण 'जीवनरेखा' करार दिया।

राज्यपाल ने यह टिप्पणी सीमा सड़क महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह के साथ बातचीत के दौरान की।

यहाँ लोक भवन में आयोजित एक भेंटवार्ता में उन्होंने राज्य में सीमा सड़क परियोजनाओं की प्रगति और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के महत्व पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि सामरिक सड़क परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा करना चाहिए। उन्होंने सचेत किया कि कठिन इलाकों में देरी या घटिया काम सीधे तौर पर कनेक्टिविटी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।

सीमा सड़क महानिदेशक ने राज्यपाल को फ्रंटियर हाईवे और अन्य ऐसी संवेदनशील सड़कों से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जिन पर प्राथमिकता के आधार काम किया जा रहा है।

राज्यपाल ने सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित सड़कों की गुणवत्ता की सराहना की और कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बाजार और आजीविका के अवसरों तक पहुंच बढ़ाकर सीमावर्ती गांवों का कायाकल्प कर दिया है।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचा भारत सरकार के 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' को मजबूती प्रदान कर रहा है। इससे सीमावर्ती बस्तियां "विकास और अवसर के केंद्रों" के रूप में उभर रही हैं।

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