वॉशिंगटन , मई 01 -- अमेरिकी संसद की दो शक्तिशाली समितियों ने चीन से जुड़ी कंपनियों द्वारा बनाए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल की एक बड़ी जांच शुरू की है। सांसदों को डर है कि इन चीनी एआई मॉडलों से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, जिसमें डेटा की चोरी और रणनीतिक रूप से चीन पर बढ़ती निर्भरता शामिल है।

होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी के अध्यक्ष एंड्रयू आर. गारबारिनो और चीन मामलों की कमेटी के अध्यक्ष जॉन मूलनार ने इस जांच का ऐलान किया। उनका मुख्य ध्यान डीपसीक, अलीबाबा, मूनशॉट एआई और मिनीमैक्स जैसी चीनी कंपनियों पर है, जिनके सस्ते एआई सिस्टम दुनिया भर में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

जांच में सबसे बड़ा आरोप यह है कि चीनी कंपनियां 'मॉडल डिस्टिलेशन' नाम की तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। आसान भाषा में कहें तो, ये कंपनियां अवैध तरीकों और फर्जी खातों के जरिए अमेरिका के महंगे और आधुनिक एआई सिस्टम की खूबियां चुरा लेती हैं। फिर वे उन्हीं खूबियों को अपने सस्ते एआई मॉडल में डाल देती हैं, लेकिन उनमें वो सुरक्षा घेरे (सेफगार्ड्स) नहीं होते जो अमेरिकी सिस्टम में अनिवार्य हैं।

सांसदों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी कंपनियां शोध में अरबों डॉलर खर्च करती हैं, जबकि चीनी कंपनियां बहुत कम लागत में उस मेहनत को चुरा रही हैं। उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा मानकों वाले इन मॉडलों का इस्तेमाल आतंकी संगठन, अपराधी या दुश्मन देश गलत कामों के लिए कर सकते हैं।

जांच के पहले चरण में 'एनीस्फीयर' और 'एयरबीएनबी' जैसी कंपनियों से जवाब मांगा गया है। एयरबीएनबी से पूछा गया है कि वह अपनी ग्राहक सेवा के लिए अलीबाबा के एआई मॉडल पर क्यों निर्भर है। सांसदों का मानना है कि सिर्फ 'सस्ता और तेज' होने के चक्कर में इन मॉडलों को अपनाना उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है।

व्हाइट हाउस के एक हालिया ज्ञापन में भी यह कहा गया था कि अमेरिका की एआई तकनीक की नकल करने की विदेशी कोशिशें दरअसल एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं। आंकड़े बताते हैं कि चीनी एआई मॉडलों का इस्तेमाल दुनिया भर में बहुत तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 के अंत में इनका उपयोग सिर्फ एक प्रतिशत था, जो 2025 के अंत तक बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत हो गया है।

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