, Feb. 16 -- काहिरा, 16 फरवरी (वार्ता/ शिन्हुआ) ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के दूसरे दौर के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा रवाना हो चुके हैं, हालांकि समझौते की शर्तों पर अभी तक दोनों देशों के बीच कोई तालमेल नहीं नज़र आ रहा।

ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, अराघची मंगलवार को होने वाली वार्ता में 'कूटनीतिक और विशेषज्ञ' प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान उनकी स्विट्ज़रलैंड के विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस, ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद अल-बुसैदी तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे। यह बैठक छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में हुए पहले दौर की वार्ता के बाद हो रही है, जिसे दोनों पक्षों ने 'अच्छी शुरुआत' बताया था, लेकिन उसमें कोई ठोस सफलता नहीं मिली थी।

जिनेवा बैठक से पहले सार्वजनिक बयानों में ईरानी अधिकारियों ने सशर्त लचीलेपन के साथ-साथ सख्त रुख भी अपनाया है। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावांची ने रविवार को बीबीसी से कहा कि प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौते को तैयार हो सकता है, लेकिन कुछ बातों से समझौता नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, " गेंद अब अमेरिका के पाले में है कि वह साबित करे कि वह वास्तव में समझौता चाहता है।"श्री तख्त-रावांची ने पुष्टि की कि ईरान अपनी नीतियों में लचीलापन दिखाने के तौर पर 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की गुणवत्ता कम करने पर चर्चा कर सकता है, लेकिन शून्य संवर्धन की कोई संभावना नहीं। उन्होंने कहा, "यह अब एजेंडे पर नहीं है।"ईरान के उप विदेश मंत्री (आर्थिक कूटनीति) और वार्ता दल के सदस्य हामिद गनबरी के हवाले से ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि ओमान के मस्कट में हुई पिछली चर्चाओं में ऊर्जा और खनन परियोजनाओं में संयुक्त निवेश तथा अमेरिका निर्मित विमानों की संभावित खरीद जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया था। श्री गनबरी ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में यह पक्का होना चाहिए कि ईरान के विदेश में रोक कर रखी गयी संपत्तियों को 'असली और इस्तेमाल करने लायक' तरीके से रिलीज़ किया जाये।

इस बीच, अमेरिका की ओर से भी समझौते को लेकर संकेत मिले जुले हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अब तक ईरान के साथ 'कोई देश समझौता नहीं कर सका' लेकिन वह इसे अंजाम देने की पूरी कोशिश करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि युद्ध की संभावनाओं को सिरे से खारिज नहीं किया है। सीबीएस न्यूज की ओर से रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, श्री ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा है कि अगर ईरान-अमेरिका के बीच समझौता नहीं हो पाता, तो वह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर इजरायल के हमलों का समर्थन करेंगे।

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