नयी दिल्ली/वाशिंगटन , जनवरी 04 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद और अमेरिका के वेनेजुएला पर शासन करने संबंधी घोषणा के एक दिन बाद श्री ट्रंप के करीबी सहयोगी एवं विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने बयान को नरमी लाते हुए रविवार को कहा कि अमेरिका का वेनेजुएला पर शासन करने का कोई इरादा नहीं है।
श्री रूबियो ने आज एक टीवी टॉक शो में कहा कि अमेरिका मौजूदा तेल प्रतिबंध को लागू करने के अलावा वेनेजुएला पर शासन नहीं करेगा। उन्होंने श्री ट्रंप के पहले के इस बयान से पैदा हुई चिंताओं को कम करने की कोशिश की कि मादुरो को हटाने के बाद अमेरिका वेनेजुएला पर शासन करेगा।
उन्होंने कहा "अमेरिका वेनेजुएला पर शासन करने या उस पर कब्जा करने की कोशिश नहीं कर रहा है।हमारा उद्देश्य वेनेजुएला के लोगों द्वारा किए गए लोकतांत्रिक परिवर्तन का समर्थन करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। यह सुझाव कि अमेरिका वेनेजुएला पर शासन करना चाहता है, सरासर गलत है।"श्री रूबियो ने कहा, "वेनेजुएला पर वेनेजुएला के लोगों द्वारा, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से शासन किया जाना चाहिए।"विश्लेषकों ने हालांकि कहा कि इस स्पष्टीकरण के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि मादुरो को हटाने के तुरंत बाद वेनेजुएला का प्रशासन कौन संभालेगा और ज़मीन पर अमेरिकी सेना और नागरिक अधिकारी क्या भूमिका निभाएंगे।
इससे पहले श्री ट्रंप ने शनिवार को अपने मार-ए-लागो निवास पर पत्रकारों से कहा था कि जब तक व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला पर ठीक से शासन करने के लिए जो आवश्यक होगा वह करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को आलोचकों ने एकतरफावाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के सबूत के तौर पर लिया। लैटिन अमेरिका के कई देशों के साथ-साथ रूस, चीन और क्यूबा ने वाशिंगटन पर एक संप्रभु राष्ट्र पर सीधा नियंत्रण थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भारत में विपक्षी दलों और रणनीतिक विश्लेषकों ने भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि ऐसे बयान ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर सकते हैं तथा वैश्विक मानदंडों को कमजोर कर सकते हैं।
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