अमेठी , जनवरी 10 -- अमेठी जिले के जायस थाना क्षेत्र में प्रतापगढ़ निवासी विजय सिंह (50) की नृशंस हत्या का मामला दिन-प्रतिदिन और रहस्यमय होता जा रहा है। गुरुवार को मोजमगंज गांव के पास नाले में मिले विजय सिंह के धड़ के दो दिन बाद भी उनका सिर बरामद नहीं हो सका है। तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ खाली हैं, जिससे इस जघन्य वारदात को लेकर आशंकाएं और चर्चाएं तेज हो गई हैं।

गुरुवार सुबह जायस थाना क्षेत्र के मोजमगंज गांव के पास नाले से विजय सिंह का धड़ बरामद हुआ था। उनका सिर धड़ से अलग था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि उनकी मौत गला रेतने से हुई। गर्दन के अलावा शरीर पर किसी अन्य प्रकार की चोट का कोई निशान नहीं मिला है। एहतियात के तौर पर विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हत्या से पहले उनके साथ और क्या किया गया था।

धड़ मिलने के तीसरे दिन भी विजय सिंह का सिर पुलिस को नहीं मिल सका है। पुलिस को आशंका है कि सिर अभी भी हत्यारों के पास हो सकता है। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह सिर को अलग ले जाना केवल पहचान छिपाने के लिए नहीं, बल्कि किसी तांत्रिक, प्रतीकात्मक या मानसिक विकृति से भी जुड़ा हो सकता है, जिससे यह मामला और अधिक रहस्यमय बन गया है।

मृतक की भांजी पूजा के घर से मोजमगंज पुल तक के पूरे इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन वे पुलिस के लिए कोई ठोस सुराग नहीं दे सके हैं। न तो विजय सिंह के जाने का कोई स्पष्ट फुटेज मिला है और न ही किसी संदिग्ध गतिविधि का। इससे यह प्रतीत हो रहा है कि हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से की गई और संभवतः ऐसी जगह अंजाम दी गई जहां निगरानी नहीं थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार हत्या में किसी करीबी व्यक्ति की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों पर भी शक की सुई घूम रही है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि मामला किसी निजी रिश्ते, आशनाई या तंत्र-मंत्र से जुड़े विवाद का हो सकता है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि विजय सिंह झाड़-फूंक और तांत्रिक गतिविधियों से जुड़े थे तथा अक्सर देवा शरीफ जाया करते थे।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव को प्रतापगढ़ ले जाने के बजाय रायबरेली के डलमऊ घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार गहरे सदमे में है और फिलहाल खुलकर कुछ कहने से बच रहा है, हालांकि वे न्याय की मांग कर रहे हैं।

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