अमेठी , जनवरी 9 -- उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में विगत तीन वर्षों 1105 दुर्घटनाओं में जहां 744 लोगों की मौत हो गई वही 586 लोग घायल हुए है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार साल 2023 में 330 दुर्घटनाओं में 228 लोगों की जान गई थी जबकि 155 लोग घायल हुए थे। साल 2024 में 356 दुर्घटनाओं में 242 लोगों की मौत हुई और 205 लोग घायल हुए तो वहीं 2025 में दुर्घटनाएं करीब 20 फीसदी बढ़कर 419 हो गई। जिसमें 274 लोगों की मौत हुई और 226 लोग घायल हुए।
बीते छह महीनो में सड़क दुर्घटनाओं में अमेठी ने कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। इस अवधि में जिले में 227 सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें 124 लोगों की मौत हुई। जबकि 152 लोग घायल हुए थे। आए दिन हो रहे सड़क हादसों के पांच बड़े कारण सामने आए है। पहला बड़ा कारण ओवरस्पीड और लापरवाही से गाड़ी चलाना है। ग्रामीण इलाके से लेकर शहर तक लोग भागम भाग भरी ज़िंदगी में ओवर स्पीड ड्राइविंग करते नजर आते है। सड़कों पर इन्हें रोकने के लिए ना तो यातायात की पुलिस नियमित चेकिंग दिखाई पड़ती है न ही स्पीड कंट्रोल कैमरे।जगह जगह स्पीड कंट्रोल कैमरे और नियमित चेकिंग लगा कर हादसों को कंट्रोल किया जा सकता है।
अमेठी के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान में चिन्हित 13 ब्लैक स्पाट में से 5 पर रोड साइन, मोड़ साइन और व रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगवाए जा चुके हैं। वहीं अन्य ब्लैक स्पाट पर भी काम किया जा रहा है।जिन स्थानों पर बार-बार हादसे हुए, वहां समय रहते न तो चेतावनी बोर्ड लगे और न ही सड़क डिजाइन में सुधार किया गया।इस तरह सड़क हादसों में लगातार वृद्धि देखने मिली है।
सड़क हादसों में ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अनदेखी भी दिखाई पड़ रही है।बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, के लोग सड़कों पर फर्राटे भरते नजर आते है।इसके अतिरिक्त ओवरलोडिंग और नशे में ड्राइविंग पर सख्ती बेअसर साबित हुई है। अधिकांश हादसों के बाद नशे में ड्राइविंग करने की बात सामने आई है।
भारी वाहनों पर सुरक्षा इंतजाम की कमी देखने को मिलती है।ट्रक, ट्रेलर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर न होने से रात में दृश्यता बेहद कम रहती है। जिससे टक्कर की घटनाएं बढ़ती हैं। पुलिस और आरटीओ द्वारा समय समय पर यातायात जागरूकता अभियान चलाया जाता है।फिर भी इसका असर बहुत कम दिखाई देता है।
खराब सड़कें, अंधे मोड़, स्ट्रीट लाइट की कमी और अस्पष्ट साइन बोर्ड हादसों को और घातक बना देते हैं। जिले के कई स्थानों पर सड़कों टूटी हुई है।जगह जगह सड़कों पर गड्ढे होने के चलते अचानक ब्रेक लेने से भी सड़क हादसों की संभावनाएं बढ़ जाती है।इस समय भी जगह जगह सड़के टूटी होने से वाहन चालक दूसरे लेन से गाड़ी पार करते है।जिससे सामने वाले वाहन चालक असमंजस की स्थिति में हो जाते है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित