बैतूल , अप्रैल 6 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के आमला शहर में अमृत 2.0 योजना और रेनवाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की धीमी प्रगति पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उपयंत्री के खिलाफ कार्रवाई की है। कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी के निर्देश पर संबंधित उपयंत्री का सात दिन का वेतन काटा गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कलेक्टर ने ग्राम हसलपुर स्थित माचना नदी पर बन रहे वाटर बॉडी निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कार्य निर्धारित समयसीमा और अपेक्षित गति के अनुरूप नहीं चल रहा है। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे।

करीब 95 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण कार्य प्रभावित हो रहा था। स्थानीय स्तर पर भी निर्माण की धीमी गति को लेकर असंतोष देखा गया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए गए और कार्य में तेजी लाने के लिए सख्त हिदायत दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वाटर बॉडी निर्माण में लापरवाही के लिए उपयंत्री सुभाष शर्मा को जिम्मेदार ठहराया गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने कलेक्टर के आदेशानुसार उनके सात दिन के वेतन कटौती की पुष्टि की है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे भी कार्यों की नियमित निगरानी जारी रहेगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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