अमृतसर , दिसंबर 15 -- पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़े दो गैंगस्टरों को मुंबई पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया है।

पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने सोमवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान गुरदासपुर के वेरोके निवासी साजन मसीह और अमृतसर के लाहौरी गेट निवासी सुखदेव कुमार उर्फ मुनीश बेदी के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है और उनके खिलाफ बटाला और अमृतसर के विभिन्न पुलिस थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियार और विस्फोटक रखने और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई मामले दर्ज हैं।

श्री यादव ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपी पाकिस्तान स्थित आईएसआई समर्थित हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा और अमेरिका में हिरासत में लिए गए बीकेआई ऑपरेटिव हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया के महत्वपूर्ण सहयोगी थे। ये दोनों दुबई और आर्मेनिया समेत विदेशों से पंजाब में आपराधिक और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने इसे पंजाब पुलिस की बड़ी सफलता बताया।

गौरतलब है कि इन निरंतर प्रयासों के तहत, पंजाब पुलिस ने विदेशों में शरण लिए हुए विभिन्न वांछित अपराधियों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाए हैं, जिससे अपराधियों का पता लगाने में मदद मिली है।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी बीकेआई से जुड़े एक नेटवर्क का हिस्सा थे, जो अमृतसर और बटाला के पुलिस थानों पर कई ग्रेनेड हमलों और जौरियां कलां के हरदीप सिंह और डेरा बाबा नानक के किराना स्टोर मालिक रवि कुमार की हत्याओं के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने आगे बताया कि आरोपी साजन मसीह एक अन्य प्रमुख सहयोगी, शमशेर शेरा उर्फ हनी के साथ समन्वय कर रहा था, जो वर्तमान में आर्मेनिया में है।

अभियान का विवरण साझा करते हुए, एआईजी एसएसओसी अमृतसर सुखमिंदर सिंह मान ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय में विकसित विशिष्ट खुफिया इनपुट पर कार्रवाई करते हुए, स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) अमृतसर और काउंटर इंटेलिजेंस, पठानकोट की एक संयुक्त टीम को तुरंत मुंबई भेजा गया और उनके उतरते ही दोनों अपराधियों को हिरासत में ले लिया गया।एआईजी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति पंजाब में सक्रिय अपने गुर्गों को रसद संबंधी सहायता, धन जुटाने के माध्यम और रणनीतिक दिशा-निर्देश प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

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