अमृतसर , नवंबर 11 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार की सिद्धांतहीन कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा श्री आनंदपुर साहिब में स्थापित भाई जैता जी की यादगार में लगी तस्वीर में भाई जैता जी को अमृतपान करवाते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की पादुकाएं दिखाना सिख सिद्धांतों, शिष्टाचार और सिख भावनाओं का उल्लंघन है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि यह स्मारक, जिसका उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया है, संगत को दिशा दिखाने की बजाय उसे नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि सिख धर्म के अनुसार, अमृत संस्कार एक पवित्र और गरिमापूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें आदर और सम्मान का भाव अवश्य होना चाहिए, लेकिन सरकार ने एक तस्वीर के ज़रिए इस पवित्र प्रक्रिया को विकृत करने की कोशिश करके एक बुनियादी उल्लंघन किया है। शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष ने धार्मिक मामलों में सरकार के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पहले भी सरकार ने श्रीनगर में एक धार्मिक समारोह के दौरान शिष्टाचार का उल्लंघन किया था और अब भाई जैता जी द्वारा स्थापित स्मारक में सिद्धांतों के खिलाफ एक तस्वीर स्थापित करके फिर से ऐसा किया है। उन्होंने कहा कि यह दुःख की बात है कि सरकार ऐसे अधिकारियों को नियुक्त कर रही है, जिन्हें धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों की कोई समझ नहीं है, जिसके कारण इस तरह के गंभीर सैद्धांतिक उल्लंघन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिख धर्म एक गरिमापूर्ण जीवन शैली का नाम है और इसकी विशिष्टता इसके मूल मूल्यों और आदर्शों में निहित है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी शुरू से ही कहती आ रही है कि सरकार श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी पर्व से संबंधित विकास कार्यों पर ध्यान दे और शिरोमणि कमेटी द्वारा आयोजित धार्मिक समागमों में सहयोग दे, लेकिन सरकार को राजनीति के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।
एडवोकेट धामी ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार को स्मारक से यह तस्वीर तुरंत हटानी चाहिए और देश से माफ़ी मांगनी चाहिए। अगर सरकार इस गंभीर मामले को हल्के में लेगी तो शिरोमणि कमेटी अपने स्तर पर इस पर कार्रवाई करने पर मजबूर होगी।
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