नयी दिल्ली , नवम्बर 18 -- सुरक्षा बलों ने मोस्ट वांटेड नक्सली 'कमांडर' मदवी हिडमा को जिस तरह 30 नवंबर की समय सीमा से 12 दिन पहले ही मार गिराया और नक्सलियों के खिलाफ जिस तरह से अभियान चल रहा है उससे लगता है कि देश से वामपंथी उग्रवाद का सफाया भी आगामी मार्च से पहले ही होने की संभावना है।
सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा से संबंधित एक बैठक में मदवी हिडमा को 30 नवम्बर तक खत्म करने के निर्देश दिये थे। सुरक्षा बलों ने इस निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 44 वर्षीय नक्सली नेता को आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के त्रि-जंक्शन पर स्थित घने पुल्लागंडी जंगलों में मार गिराया।
सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने देश से माओवादी समस्या के उन्मूलन के लिए अगले वर्ष 31 मार्च की समय सीमा तय की है लेकिन जिस तरह से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चल रहे हैं उससे वामपंथी उग्रवाद के इस समय सीमा से पहले ही खत्म हो जाने की संभावना है।
वर्ष 1981 में सुकमा में जन्मा हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन का कमांडर और माओवादी केंद्रीय समिति का सदस्य था। सूत्रों का कहना है कि ऐसा माना जाता था कि वह बस्तर से इस शीर्ष नेतृत्व समूह का हिस्सा बनने वाला एकमात्र आदिवासी सदस्य था। वह 26 से अधिक बड़े नक्सली हमलों में शामिल था जिससे वह सबसे खूंखार नक्सलियों में शुमार था।
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