चेन्नई , जनवरी 22 -- तमिलनाडु में सत्तारुढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम(द्रमुक) ने उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी के युवा विंग के सचिव उदयनिधि स्टालिन पर टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को मद्रास उच्च न्यालय द्वारा रद्द करने को अनुचित करार दिया है।
द्रमुक के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि न्यायाधीश के व्यक्तिगत विश्वास का फैसले में कोई स्थान नहीं है।
श्री अन्नादुरई ने एक्स पर अपनी पोस्ट में उच्च न्यायालय की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने ऑडी अल्टरम पार्टम (दूसरे पक्ष की बात सुने बिना उसे दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए) के सिद्धांत का पालन नहीं किया।
उन्होंने कहा, "यह न्यायशास्त्र के एक मूलभूत सिद्धांत का पालन नहीं करता है। ऑडी अल्टरम पार्टम... न्यायाधीश की व्यक्तिगत आस्था या विचारधारा को फैसले में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए।" उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए यह बात की जिसमें श्री गोयल ने दावा किया था कि उच्च न्यायालय का फैसला 'द्रमुक की संकीर्ण, हिंदू विरोधी मानसिकता पर एक करारा प्रहार' है।
श्री मालवीय की पोस्ट के बाद, अयोध्या के एक साधु ने श्री उदयनिधि का सिर कलम करने के लिए 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी।
यह मामला श्री उदयनिधि के 2023 के उस भाषण से जुड़ा है जिसमें उन्होंने सनातन की तुलना डेंगू और मलेरिया से की थी और तमिलनाडु प्रगतिशील लेखक एवं कलाकार संघ द्वारा चेन्नई में आयोजित 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में इसके उन्मूलन का आह्वान किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि श्री उदयनिधि ने सनातन धर्म के अनुयायियों के नरसंहार का आह्वान किया है। इसके बाद द्रमुक के एक पदाधिकारी ने शिकायत दर्ज करवाई और मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। न्यायमूर्ति एस श्रीमाथी की पीठ ने बुधवार को पारित अपने आदेश में कहा कि श्री मालविया की पोस्ट पहले से ही प्रसारित एक सार्वजनिक भाषण की प्रतिक्रिया थी और इसलिए उन पर मुकदमा चलाने से 'अपूरणीय क्षति और नुकसान' होगा।
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