वाराणसी , जनवरी 9 -- उत्तर प्रदेश में वाराणसी के चौक थाने में दर्ज एक मामले में आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अधिकारी अमिताभ ठाकुर को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें तथा एक बांड (बंधपत्र) पर रिहा करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव ने दलील दी कि यह मुकदमा मात्र राजनीतिक विद्वेष तथा शासन-प्रशासन के दबाव में दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि अमिताभ ठाकुर एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें प्रदेश सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण जबरन सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

बर्खास्तगी के बाद उन्होंने 'आजाद अधिकार सेना' नामक सामाजिक संगठन की स्थापना की और देश-प्रदेश में हो रहे कानून-विरुद्ध कार्यों तथा सरकारी अधिकारियों-राजनेताओं के भ्रष्टाचार को उजागर करने का कार्य किया। वहीं अभियोजन पक्ष एवं वादी के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी के खिलाफ दस मुकदमों की हिस्ट्रीशीट है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अमिताभ ठाकुर को जमानत प्रदान कर दी।

बड़ी पियरी निवासी समाजसेवी अम्बरीष सिंह 'भोला' ने चौक थाने में 9 दिसंबर 2025 को यह मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 30 नवंबर 2025 को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन पर आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के झूठे आरोप लगाए गए थे।

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