बैतूल , नवम्बर 18 -- मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सात आयुर्वेदिक दवाओं को अमानक घोषित कर उनकी बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है, लेकिन बैतूल जिले में इन दवाओं की खुलेआम बिक्री अब भी जारी है। ग्वालियर स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद इन दवाओं को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जिसके बाद छिंदवाड़ा जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला यातवकर ने 17 नवम्बर को आदेश जारी कर इनकी बिक्री पर रोक लगा दी।
अमानक घोषित दवाओं में डाबर, शिवायु और श्री धन्वंतरि हर्बल्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के उत्पाद शामिल हैं। इनमें गिलोय सत्व सिरप, काम दूधा रस, प्रवाल पिष्टी, मुक्ता शुक्ति भस्म, लक्ष्मी विलास रस, कफ कुठार रस और कासामृत सिरप शामिल हैं। इन दवाओं का निर्माण दतिया, सोलन, गाजियाबाद और औरंगाबाद स्थित इकाइयों में हुआ था।
हालांकि बैतूल जिले में इन दवाओं की बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जिले के कई मेडिकल स्टोर्स ने बताया कि उन्हें न तो कोई प्रतिबंधात्मक आदेश मिला है और न ही किसी प्रकार की सूचना दी गई है, जिसके चलते ये दवाएं अब भी काउंटर पर उपलब्ध हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज हुरमाड़े ने कहा कि उन्हें इस विषय की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और वे सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर संजीव जादौन ने स्पष्ट किया कि यह मामला आयुर्वेद विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
आयुष अधिकारी डॉ. योगेश चौकीकर ने स्वीकार किया कि डाबर के उत्पाद भी सूची में शामिल हैं और विभागीय कार्यभार के कारण कार्रवाई में विलंब हुआ है। उन्होंने बताया कि अब बिक्री रोकने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
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