अमरोहा , दिसंबर 14 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में सहकारी चीनी मिल की हालत निजीकरण के बाद और बदतर हो चुकी है जबकि कालाखेड़ा शुगर मिल 35 वर्ष पुरानी मशीनरी के कारण खस्ता हाल का शिकार है। जिले में चीनी उद्योग की स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बसपा शासनकाल ,में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने जिले की कुंदन शुगर सहकारी चीनी मिल को मात्र 17 करोड़ रुपये में पोंटी चड्ढा ग्रुप (वेव शुगर) को इस शर्त पर बेच दिया था कि वह सीजन में गन्ना पेराई जारी रखेंगे लेकिन चीनी मिल तभी से बंद पड़ी हुई है।
2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा चीनी मिल को चालू कराने का वादा किया था।जानकारों का मानना है कि उक्त चीनी मिल की संपत्ति बिक्री मूल्य से कहीं ज्यादा अधिक था। यह बिक्री कौड़ियों के भाव बताई गई थी, जिसकी जांच सीबीआई और ईडी द्वारा भी की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। बताया गया है कि कानूनी पेचीदगियों के चलते मिल बंद पड़ी है और किसानों को दूर-दूर तक गन्ना पहुंचाना पड़ता है। इस निजीकरण से क्षेत्र के हजारों किसान प्रभावित हुए। दूसरी ओर, जिले की एकमात्र सहकारी चीनी मिल किसान सहकारी चीनी मिल (कालाखेड़ा) गजरौला हसनपुर 35 वर्ष से अधिक पुरानी मशीनरी से जूझ रही है। मिल की पेराई क्षमता मात्र 2500 टीसीडी है, जो अपर्याप्त हो चुकी है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हसनपुर में जनसभा के दौरान मिल के विस्तारीकरण की घोषणा की थी। सरकार ने 2500 से 4900 टीसीडी क्षमता बढ़ाने, डिस्टिलरी और बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई, लेकिन सात वर्ष बीतने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हुआ। 2024-25 में बजट प्रावधान और 2025 में फिर घोषणाएं हुईं, पर जमीनी प्रगति शून्य है। मिल में तकनीकी खामियां बार-बार सामने आती हैं, जिससे पेराई प्रभावित होती है और किसानों का गन्ना बकाया रहता है।
चीनी मिल मुख्य प्रबंधक रामकेश सिंह ने रविवार को यूनीवार्ता को बताया कि प्रदेश में इस समय सरकार अधीन कुल 23 चीनी मिलें हैं। पेराई सत्र के दौरान मशीनरी में तकनीकी गड़बड़ी की वजह से चीनी मिल में अवरोध पैदा हो गया था। मशीनों को ठीक कराने के बाद से चीनी मिल निरंतर चल रही है।अब तक आठ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है।जिसकी चीनी रिकवरी 11 आई है। नजीबाबाद (बिजनौर) सहकारी चीनी मिल की सर्वाधिक चीनी रिकवरी 11.25 है। जबकि निजी चीनी मिलों में चंदनपुर के अलावा वेव शुगर्स (चढ्ढा शुगर्स)की 11 के लगभग चीनी रिकवरी आ रही है।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसलिए पुरानी मशीनरी से पेराई किए जाने के बेहतर प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी का कहना है कि उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार में अपने करीबी पोंटी चढ्ढा को अमरोहा व चांदपुर (बिजनौर) स्थित सहकारी चीनी मिलों को वेव शुगर्स (पोटीं चढ्ढा) को औने-पौने दामों में बेच दिया गया था।उस समय आंदोलन के दौरान कहा गया था कि उक्त चीनी मिलों को चालू रखा जाएगा लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। तब से लेकर प्रदेश सरकार का सहकारी चीनी मिलों की तरफ़ कोई ध्यान नहीं है।
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