अमरोहा, नवंबर 07 -- देश के इतिहास के सबसे विशाल गौरक्षा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले गोभक्तों की स्मृति में उत्तर प्रदेश के अमरोहा में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखा गया।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन शुक्रवार को मंडी धनौरा स्थित श्रीमती कमलेश जिंदल ट्रस्ट द्वारा किया गया। हरिद्वार शुक्रताल तथा बृजघाट गढ़मुक्तेश्वर की गौशालाओं में गायों की सेवा के लिए दान करने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ बीएस जिंदल ने कहा कि सात नवंबर 1966 को दिल्ली में गोवध बंदी को लेकर इतिहास का सबसे विशाल गौरक्षा आंदोलन हुआ था। जिसमें सर्वदलीय आंदोलन के समन्वयक के रूप में स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में स्वामी ब्रह्मानंद भूरी वाले पंजाब समेत लगभग दस लाख साधु-संत, गोभक्त और हिन्दू संगठन संसद भवन पहुंचे थे। जहां उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार से की गई थी लेकिन दुर्भाग्यवश इंदिरा गांधी सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के बाद पुलिस द्वारा गोली चलवाई गई, जिसमें आधिकारिक रूप से आठ साधुओं की मौत हो गई थी तथा सप्तसरोवर रोड़ हरिद्वार स्थित स्वामी लालदास भूरी वाले ब्रहमनिवास आश्रम के संस्थापक स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज भूरी वाले समेत देश के सैंकड़ों संत घायल हुए थे।
उन्होंने कहा कि श्रीमती कमलेश जिंदल ट्रस्ट द्वारा गोरक्षा के लिए बलिदान देने वाले संतों की याद में प्रतिवर्ष अलग-अलग गोशालाओं में दान-पुण्य किया जाता है। उन्होंने कहा कि संतों के बलिदान के बावजूद आज़ भी देश के विभिन्न हिस्सों में गोवंश की अवैध तस्करी जारी है। उत्तर पूर्व केरल तथा पश्चिम बंगाल में स्थिति और भी ख़राब है। कहा कि सनातन परंपरा में गाय का महत्व है। केंद्र एवं राज्य सरकार इस संबंध में कठोर कानून बनाएं। गोशालाओं का विस्तार,दूध,खाद पर सब्सिडी देकर आर्थिक अनुदान देकर किसानों को वैकल्पिक आय सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर गोपालक व भाजपा किसान मोर्चा के नेता कैलाश गुर्जर , गिरीराज सिंह, नरेन्द्र कटारिया आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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