कोलकाता , मार्च 06 -- तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के प्रकाशन में कथित प्रक्रियात्मक खामियों और पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को संबोधित छह मार्च के पत्र में डायमंड हार्बर के सांसद ने 28 फरवरी को सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन का उल्लेख किया और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े कई मुद्दों का उल्लेख किया।
श्री बनर्जी ने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी के जारी संचार में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया गया है कि पूरक सूची के जरिये जोड़े गये मतदाताओं को विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची का हिस्सा माना जायेगा।
पत्र में कहा गया है, "माननीय उच्चतम न्यायालय के जारी निर्देशों के आलोक में सम्मानपूर्वक यह प्रस्तुत किया जाता है कि उपर्युक्त संचार में स्पष्ट रूप से संकेत दिया जाना चाहिए था कि पूरक मतदाता सूची दैनिक आधार पर तैयार और प्रकाशित की जायेंगी।"उन्होंने बताया कि अदालत ने निर्देश दिया था कि दैनिक पूरक सूची के जरिये शामिल किये गये मतदाताओं को 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम सूची का हिस्सा माना जाना चाहिए।
श्री बनर्जी ने लिखा, "अधिसूचना में यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि दैनिक पूरक सूची के जरिये शामिल किये जा रहे इन सभी मतदाताओं को 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची का हिस्सा माना जाना चाहिए।"पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने यह आरोप भी लगाया कि चुनाव आयोग उन दावों और आपत्तियों पर हुए निर्णयों के परिणामों को दर्शाने वाली पूरक मतदाता सूचियों का दैनिक सार्वजनिक खुलासा सुनिश्चित करने में विफल रहा है, जो मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित हैं।पत्र के अनुसार, हालांकि न्यायिक अधिकारियों के लिए सत्यापन विवरण और निर्णय रिकॉर्ड अपलोड करने के लिए समर्पित पोर्टल बनाया गया है, लेकिन यह जानकारी जनता के लिए सुलभ नहीं है। श्री बनर्जी ने तर्क दिया कि सार्वजनिक प्रकटीकरण की यह कमी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को कमजोर करती है।
पत्र में कहा गया है, "ऐसी पारदर्शिता के अभाव में, मतदाता, राजनीतिक दल और अन्य हितधारक लंबित मामलों की स्थिति या उन पर दिये गये निर्णयों का पता लगाने में असमर्थ हैं।"इसमें चेतावनी दी गयी है, "पूरक मतदाता सूचियों का प्रकाशन न होना या देरी से होना उन मतदाताओं के बीच व्यापक अनिश्चितता और चिंता पैदा कर सकता है, जिनके मामले अभी विचाराधीन हैं।"उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब किसी मतदाता का नाम निर्णय के बाद खारिज कर दिया जाता है, तो उसके विस्तृत कारणों का उल्लेख होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इन कारणों को पूरक सूचियों में स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित मतदाता कानूनी उपचार का सहारा ले सकें।पत्र में कहा गया है, "आगे यह प्रस्तुत किया जाता है कि जहां निर्णय के बाद किसी भी मतदाता के नाम को शामिल करने से मना कर दिया जाता है, वहां निर्णय लेने वाले प्राधिकारी के दर्ज किये गये विशिष्ट कारणों को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए।"श्री बनर्जी ने चुनाव आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपायों की मांग की। इनमें औपचारिक रूप से यह सूचित करना शामिल है कि दैनिक पूरक सूची के माध्यम से जोड़े गये मतदाता अंतिम सूची का हिस्सा होंगे। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ऐसी सूचियों का दैनिक प्रकाशन सुनिश्चित करना और निर्णयों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना शामिल है।
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