रायबरेली, जनवरी 22 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली के महराजगंज इलाके में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने आज खुलासा किया है।

मौसेरे भाई ने ही अपनी मौसी के इकलौते इंजीनियर पुत्र की साजिशन हत्या कर दी थी। करीब छह माह तक रहस्य बनी रही इस मौत का खुलासा बिसरा रिपोर्ट आने के बाद हुआ, जिसमें जहर दिए जाने की पुष्टि हुई। इस हत्याकांड में शामिल चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस सूत्रों से गुरुवार को मिली जानकारी के अनुसार, थाना महराजगंज इलाके में वर्ष 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए अभियंता अभिषेक यादव की मौत को पहले स्वाभाविक मान लिया गया था। मृतक एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर के पद पर कार्यरत था और परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। मामले में तब नया मोड़ आया, जब पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित रखे गए बिसरा की जांच रिपोर्ट में विषाक्त पदार्थ की पुष्टि हुई।

जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि मृतक के मौसेरे भाई दिलीप यादव का उसके घर आना-जाना लगातार बना हुआ था। पैसों के लेन-देन और आपसी रंजिश के चलते साजिश रची गई। 27 जून 2025 को दिलीप यादव मृतक को कार से अपने साथ ले गया और रास्ते में जहर देकर उसकी हत्या कर दी। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बिसरा रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में दिलीप यादव, पंकज यादव, शशिकांत और राजेश यादव शामिल हैं। इनमें राजेश यादव अमेठी जिले का निवासी बताया गया है।

पुलिस ने चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई से न सिर्फ एक जघन्य हत्या का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि यह भी साबित हुआ कि अपराध चाहे जितना पुराना हो, सच्चाई देर-सबेर सामने आ ही जाती है।

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