कोटा , जनवरी 01 -- राजस्थान में कोटा नगर निगम में पट्टे के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अब पट्टा, जी प्लस वन की भवन निर्माण स्वीकृति और विक्रय स्वीकृति एक साथ जारी कर दी जाएगी।

निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने गुरुवार को बताया कि नियमों में सरलीकरण करते हुए इसके आदेश जारी किये गये हैं। उन्होंने बताया कि कोई नाम हस्तांतरण के लिए आवेदन करता है तो उसे भी विक्रय स्वीकृति साथ में ही जारी कर दी जाएगी। निगम में होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। निर्धारित समय सीमा में आवेदन का निस्तारण नहीं करने वाले या अनावश्यक चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

श्री मेहरा ने बताया कि पूर्व में आवेदक पहले पट्टे के लिए निगम में आता था, पट्टा जारी होने पर भवन निर्माण स्वीकृति और फिर भविष्य में आवश्यकता होने पर विक्रय स्वीकृति के लिए चक्कर काटता था। इसी तरह कि प्रक्रिया नाम हस्तांतरण और विक्रय स्वीकृति के मामले में भी होती थी। शहरी समस्या समाधान शिविरों में आये परिवादों की समीक्षा के दौरान आमजन के बार-बार चक्कर काटने और विभिन्न कार्यों के समयावधि में पूरे नहीं होने की बात सामने आयी। उन्हाेंने बताया कि इसको देखते हुए अब निर्णय लिया गया है कि आवंटी के पक्ष में पट्टा जारी किये जाने पर पट्टा शुल्क के साथ भूतल ़और प्रथम तल की निर्माण स्वीकृति शुल्क और विक्रय स्वीकृति शुल्क भी जमा करके पट्टे के साथ-साथ निर्माण स्वीकृति एवं विक्रय स्वीकृति भी जारी कर दी जाएगी। राज्य सरकार के आदेेशों के अनुसार नाम हस्तान्तरण, उपविभाजन-पुनर्गठन, विक्रय स्वीकृति के मामलों में मौका स्थिति, वॉयलेशन की जांच अपेक्षित नहीं होगी। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया अनुसार दस्तावेजों की जांच करके नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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