दंतेवाड़ा, जनवरी 03 -- दक्षिण बस्तर के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में आदिवासी ग्रामीणों ने अपने श्रमदान और देशी जुगाड़ से ऐसा काम कर दिखाया है, जिसने वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या को काफी हद तक दूर कर दिया है। बांस, लकड़ी और पत्थरों से बनाए गए अस्थायी पुलों के कारण जहां जिला मुख्यालय की दूरी व्यवहारिक रूप से कम हुई है, वहीं तुलार धाम शिव मंदिर तक श्रद्धालुओं की पहुंच भी अब कहीं अधिक आसान हो गई है।
दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमा से लगे अबूझमाड़ क्षेत्र के थुलथुली, बोंडोसी, कोहकाबेड़ा, बुडदुम, तोड़मा और मंगनार जैसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने नदी-नालों पर खुद से पुल और पुलिया तैयार की है। भैरमगढ़ विकासखंड के तुषवाल पंचायत के आश्रित ग्राम बुडदुम में ग्रामीणों ने अबूझमाड़ के बीचोंबीच बहने वाली गुडरा नदी पर करीब 50 मीटर लंबी अस्थायी पुलिया का निर्माण किया है। यह पहल माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के अवसर पर तुलार धाम शिव मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए की गई है।
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