अदीस अबाबा , दिसंबर 02 -- अफ्रीकी संघ (एयू) ने गुलामी, उपनिवेशवाद और नस्लीय भेदभाव को ऐतिहासिक अपराधों के रूप में औपचारिक मान्यता देने और इन्हें महाद्वीप के निवासियों पर किये गये अपराध घोषित करने का अपना अभियान तेज कर दिया है।

अफ्रीका महाद्वीप के नेता 30 नवंबर से एक दिसंबर तक अल्जीरिया में मिले, जहाँ वर्ष 2025 को 'क्षतिपूर्ति का वर्ष' घोषित किया गया।

अल्जीरिया के विदेश मंत्री अहमद अत्ताफ़ ने अपने भाषण में अपने देश में फ्रांस के औपनिवैशिक शासन का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि उपनिवेशवाद को एक अंतर्राष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि फ्रांस ने अल्जीरिया को एक अलग देश बनाने की कोशिश की थी। यहाँ के लोगों की पहचान, संस्थानों, संस्कृति, धर्म और यहां तक कि इस देश की भाषा को भी बदल दिया।

श्री अत्ताफ़ ने कहा, "यह औपनिवेशिक परियोजना आधुनिक इतिहास में सबसे लंबी चलने वाली परियोजना थी। 132 साल तक फ्रांसीसी हर तरह के अपराध करते रहे।" उन्होंने कहा कि अफ्रीका औपनिवेशिक काल के दौरान अपने लोगों के खिलाफ किए गए अपराधों की आधिकारिक और स्पष्ट मान्यता की मांग करने का हकदार है। यह महाद्वीप अपने लोगों के खिलाफ किए गए अत्याचारों की अभी भी भारी कीमत चुका रहा है।

गौरतलब है कि अफ्रीकी और कैरिबियाई सरकारें एवं कार्यकर्ता गुलामी और औपनिवेशिक शासन के लिए मुआवजे और अन्य प्रकार के निवारण की दशकों से मांग रहे हैं।

श्री अत्ताफ़ ने अफ्रीका में औपनिवेशिक काल के कई अत्याचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कॉन्गो में बेल्जियम के औपनिवेशिक शासन का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे स्थानीय लोगों से जबरन श्रम करवाया जाता था और लाखों लोगों के अंग काट दिये गये और मार दिया गया।

विदेश मंत्री ने नामीबिया में जर्मनी के शासन के दौरान हेरेरो और नामा लोगों के नरसंहार को याद किया, जिसे अक्सर 20वीं सदी का पहला नरसंहार बताया जाता है। उन्होंने कैमरून में फ्रांसीसी सैन्य अभियानों का भी जिक्र किया गया, जहाँ औपनिवेशिक विरोधी विद्रोहों के दौरान गांवों को जला दिया गया और हजारों लोग मारे गए थे।

श्री अत्ताफ़ ने अंगोला और मोजाम्बिक में पुर्तगाल के अभियानों का भी उल्लेख किया। यहाँ 1961-1974 के युद्धों के दौरान सामूहिक हत्याएं की गयी, बड़ी संख्या में लोगों को निर्वासन और बस्तियों को जला दिया गया। उन्होंने कहा कि अल्जीरिया ने खुद एक खूनी युद्ध और वर्षों के दमन के बाद 1962 में फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।

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