सतीश सिंहलखनऊ , मार्च 23 -- उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि "अफसरों की नाकामी का फायदा सपा को मिल रहा है।"डॉ. संजय निषाद ने सोमवार को यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि सपा का 'पीडीए' अधिकारियों की नाकामी है। अधिकारी लड्डू परोस रहे हैं सपा को। जैसे लेखपाल की भर्ती, पशुधन की भर्ती। पहले आरक्षण का सही से पालन न करो, फिर उसे सुधारो। अधिकारी किसलिए बैठे हैं। क्या कर रहे हैं। अभी एसआई की परीक्षा हुई, अधिकारी पेपर पढ़ नही सकते तो किसलिए बैठे हैं। यह सपा को लड्डू नही परोस रहे हैं तो क्या कर रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नही है कि सारे अधिकारी दोषी हैं। ज्यादातर ठीक हैं, तभी तो अच्छा काम हो रहा है।

उन्होने कहा कि इस बार चुनाव में हमारा मुद्दा आरक्षण में हमारी गिनती अनुसूचित में कराने की है। संविधान के हिसाब से केंद्र सरकार की अधिसूचना से लेकर राष्ट्रपति की अधिसूचना में भी मांझी, मल्लाह, केवट अनुसूचित में आते हैं। यहां तक की राज्यपाल की तरफ से 31 दिसम्बर 2016 को जारी अंतिम अधिसूचना में पिछड़े से अनुसूचित में शामिल करने को लेकर नई सूची बनाने को कहा गया। पर, वह अभी लागू नहीं हुआ है। अभी तक 26 दिसम्बर वाली ही अधिसूचना लागू है। ऐसे में हमारी मांग है कि ओबीसी से 9 प्रतिशत काट कर एससी में शामिल किया जाए।

ओमप्रकाश राजभर के सामाजिक न्याय समिति की मांग पर उन्होंने कहा कि वह बटवारा चाह रहे हैं ओबीसी में और हम बटवारा नहीं चाहते हैं हम संविधान वाला चाहते हैं। संविधान के हिसाब से अनुसूचित जाति की सूची में हरिजन, धोबी, मझवार, पासी आते हैं। मांझी, केवट, मल्लाह को मझवार में गिना है। इसी के आधार पर केवट मल्लाह, माझी को मझवार में गिना जाए। भर नियमतः अनुसूचित में आते हैं। वह अनुसूचित का प्रचार नही कर रहे हैं, वह पिछड़े में बटवारा चाह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा वर्ग-3 की जमीन का मुद्दा है। जिसे हम अंग्रेजों ने दिया था। वर्ग-3 की जमीन का मतलब तालाब आदि की भूमि। जो पहले निषादों के नाम दर्ज होती थी, जिससे वो जीवन यापन कर सके। बसपा के समय इसे वायस ले लिया गया। जिसे फिर से वापस दिलाने की मांग है। तीसरा बालू खनन, जो निषादों के नाम था। कल्याण सिंह के समय इसे वापस ले लिया गया। चौथा मुद्दा विमुक्त जातियों से सम्बंधित है। जिसमे अनुसूचित जनजाति का लाभ उन्हें मिलना चाहिए।

चुनाव को लेकर सीटों की मांग के मसले पर डॉ. संजय निषाद ने कहा कि जीती हुई व हारी हुई सीटें तो रहेंगी। इसके अलावा समय आने पर खुलासा होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने अंदर बहुत सुधार कर लिया, जिसका उसको फायदा भी मिल रहा है। सपा ने सुधार नहीं किया इसलिए वह आज बैक फुट पर है। मैं सपा को भी सुझाव देता रहता हूं, भाड़े के पहलवान बंद करो और अपनी नीतियों का प्रचार करो। अखिलेश ने काम कम नहीं किया मगर प्रचार ही नहीं हुआ। पिछड़ों के नेता हो तो पिछड़ों को गले लगाओ। राम राजा होकर सुग्रीव को गले लगा सकते हैं और आप 5 दिन तक मिलोगे नहीं तो कौन सी राजनीति करोगे।

डॉ. संजय निषाद ने कहा कि यहां योगी का दरबार खुला है, जो चाहे वह पर्ची लगाकर आ जाए। मतलब जिसकी सरकार है वह दिन भर मिल रहा है जिसकी नहीं है वह 5 दिन बाद मिले तो क्या मतलब। जहां तक 2027 की बात है तो भाजपा फिर आएगी। राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह लोग फ्री में प्रचार कर रहे हैं काशीराम का नाम लेने का मतलब मायावती। मायावती उनकी उत्तराधिकारी है। आप काशीराम के मिशन का प्रचार कर रहे हैं। ये जितना प्रचार करेंगे बसपा उतना ही मजबूत होगी। बिना प्रचार के लोकसभा चुनाव में हर सीट पर बसपा 50000 से 1 लाख तक वोट पाई।

यूपी में कांग्रेस-बसपा-ओवैसी के साथ आने की संभावना को लेकर उन्होंने कहा कि बसपा कभी नहीं जाएगी कांग्रेस के साथ। कांग्रेस का जो वोट है वही निकाल कर बसपा लाई है तो वह कभी नहीं चाहेगी कि मेरा वोट उसमें शिफ्ट हो जाए। यही हाल अखिलेश के साथ है। इन लोगों को ममता बनर्जी जैसे रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अभी 89 लोगो को हर पांच विधानसभा का प्रभारी बनाया है। गोरखपुर के बाद अब वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ पर पार्टी का फोकस है। उसके बाद कानपुर, बुंदेलखंड। धीरे-धीरे सारा कार्य हो रहा है।

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