लखनऊ , मार्च 28 -- उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र के दौरान अफसरों की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हुए थे। इसको लेकर सरकार ने अपने स्तर से दिशा निर्देश भी जारी किए थे लेकिन कन्नौज में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई देरी ने प्रशासनिक कार्यशैली और समयबद्धता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण के मुख्य अतिथि के रूप में समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण अतिथि को लगभग 45 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। अंततः स्थिति में सुधार न होते देख उन्हें कार्यक्रम स्थल से वापस लौटना पड़ा। इस घटना को लेकर मुख्य अतिथि असीम अरुण ने कहा है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष या पद के अपमान का नहीं, बल्कि कार्य-संस्कृति में व्याप्त लापरवाही का प्रतीक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्य अतिथि कोई आम नागरिक होता, तो क्या इस देरी को उतनी ही गंभीरता से लिया जाता। क्या हर नागरिक के समय का मूल्य समान नहीं है? क्या पद पर बैठे लोगों को दूसरों का समय नष्ट करने का नैतिक अधिकार है।
हालांकि घटना के बाद जिलाधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से मिलकर माफी मांगने और लिखित रूप में खेद व्यक्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य अतिथि ने अपने समर्थकों और सहयोगियों से किसी प्रकार के प्रदर्शन या आंदोलन से बचने की अपील की और कहा कि इस घटना को एक सीख के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो कार्य-संस्कृति में व्याप्त अधकच्चेपन और लापरवाही को तत्काल समाप्त करना होगा। समयबद्धता को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।
उन्होंने जापान, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां समय का पालन अनुशासन और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, जिसे भारत में भी अपनाने की आवश्यकता है। असीम अरुण ने देश के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेता समयबद्धता और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर इस सांस्कृतिक बदलाव को जमीन पर उतारा जा सकता है।
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