चंडीगढ़ , नवंबर 01 -- पंजाब विश्वविद्यालय की 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को मनमाने ढंग से भंग करने के निर्णय पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस तानाशाही फैसले को पंजाब की गौरवशाली विरासत, लोकतंत्र और बौद्धिकता पर सीधा हमला करार दिया।

श्री बैंस ने शनिवार को कहा कि यह शासन नहीं, बल्कि राजनीतिक दादागिरी है। केंद्र का यह एकतरफा कदम पंजाब की मेहनत से अर्जित की गयी स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को रौंदने वाला है। यह पंजाब की आत्मा पर प्रहार है।

पंजाब विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व का उल्लेख करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि दशकों की सामूहिक मेहनत, बौद्धिकता और कुर्बानियों से निर्मित संस्थान है। उन्होंने सीनेट भंग करने के पीछे की संकीर्ण मानसिकता पर सवाल उठाते हुए पिछली सीनेट चुनावों में पंजाब के लोगों द्वारा दिये गये स्पष्ट जनादेश का भी उल्लेख किया।

श्री बैंस ने कहा कि पिछली सीनेट चुनावों में ग्रेजुएट हलके के लिए पंजाब के लोगों ने सभी सीटें जीतकर अपने प्रतिनिधि चुने थे। यह जनता का स्पष्ट जनादेश था। अब केंद्र सरकार, जो बैलेट बॉक्स के ज़रिए जनता का विश्वास नहीं जीत सकी, अपने चहेतों को आगे लाकर इस सम्मानित और ऐतिहासिक विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहती है। इस कदम को 'कब्ज़े और दादागिरी भरी कार्रवाई' बताते हुए शिक्षा मंत्री द्वारा केंद्र सरकार नियंत्रण को केंद्रीकृत करने, पंजाब की अलग आवाज़ को दबाने और भारतीय संविधान में निहित संघवाद के सिद्धांतों को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने की छिपी हुयी खतरनाक साज़िश को उभारा।

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