नासिक , जनवरी 25 -- महाराष्ट्र के हजारों किसान प्याज के दामों में भारी कमी आने से हुई भरपाई और अन्य मांगों के समर्थन में मुंबई के लिए पैदल निकल पड़े हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को 'लॉन्ग मार्च' के लिए निकले किसानों की संख्या पंद्रह हजार के आसपास है जिनमें से अधिकतर नासिक जिले के आदिवासी क्षेत्र के हैं।

अपनी मांग के समर्थन में किसानों का यह 'लॉन्ग मार्च' फडणवीस सरकार का तनाव बढ़ा सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र में प्याज के दामों में भारी कमी आने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। वे चाहते हैं कि सरकार इन नुकसानों के लिए पर्याप्त मुआवजा दे।

मार्च में भाग लेने वाले सभी किसान अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले नासिक में इकट्ठा हुए। यह 2018 के बाद से नासिक में चौथा बड़ा किसान आंदोलन है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों को शुक्रवार को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, मगर किसानों ने न्यौता स्वीकारा नहीं और महसरूल से मुंबई के लिए अपना 'लॉन्ग मार्च' शुरू कर दिया। अखिल भारतीय किसान सभा की महाराष्ट्र इकाई के महासचिव अजीत नवाले ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को राहत देने का इरादा नहीं रखती है।

श्री नवाले ने कहा, "जब भी प्याज के दाम गिरे हैं, वही पुरानी कहानी रही है। हमने दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को भी उठाया है, लेकिन सरकार केवल आश्वासन दे रही है। हमें न्याय नहीं मिला। किसान न्याय के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे। हमारा यह मार्च उसी दिशा में एक कदम है। हम 5 फरवरी तक मुंबई पहुंच जायेंगे।"सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी एल कराड ने कहा, "किसानों को बिजली नहीं मिल रही है। वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) को सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। सरकार को आदिवासियों की समस्याओं की याद दिलाने की जरूरत है।"उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम पारित हुए 18 साल हो चुके हैं, लेकिन जो आदिवासी भूमि पर खेती करते हैं, उन्हें अब तक भूमि अधिकार नहीं मिले हैं। लिखित आश्वासनों के बावजूद कुछ नहीं हुआ है। यहां तक कि अब तक एफआरए के तहत तैयार की गयी भूमि रिकॉर्ड में भी कई खामियां हैं।

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