बेंगलुरु , दिसंबर 08 -- कर्नाटक भाजपा ने सोमवार को गंभीर आरोप लगाया है कि राज्य की महत्वाकांक्षी अन्न भाग्य योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों के लिए रखा गया मुफ्त चावल बड़े पैमाने पर चोरी करके विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।
भाजपा ने इस कथित तस्करी की जांच के लिए राज्य सरकार से तत्काल विशेष जांच दल ( एसआईटी) गठित करने की मांग की है।
भाजपा के विधान परिषद सदस्य सीटी रवि ने सोमवार को शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कहा कि गरीबों के लिए रखा गया चावल बीच में ही हाईजैक करके विदेशों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। "अन्न भाग्य योजना के लाभार्थियों के लिए रखा गया 25 किलो का एक बोरा विदेशी बाजारों में 8,000 रुपये तक में बिका है।" उन्होंने इसे "जनता के विश्वास का गंभीर उल्लंघन" करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
राज्य सरकार ने माना है कि सब्सिडी वाला चावल डायवर्ट हुआ है। सरकार के अनुसार 2025-26 वित्तीय वर्ष में अब तक 29.60 लाख किलो चोरी का पीडीएस चावल जब्त किया गया है। पूरे राज्य में 461 एफआईआर दर्ज की गई हैं। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच अन्न भाग्य योजना का 14.27 करोड़ का चावल अवैध चैनलों से बरामद किया गया।
जांच में पता चला है कि कई मामलों में चावल को अलग-अलग ब्रांड नामों से दोबारा पैक किया गया, कभी-कभी विदेशी स्टाइल की पैकेजिंग में, और फिर निर्यात कर दिया गया। निजी चावल मिलें और बिचौलिए इस अवैध कारोबार में शामिल पाए गए हैं, जिससे निगरानी और आपूर्ति शृंखला में भारी खामियां उजागर हुई हैं।
कई जिलों में सीआईडी जांच शुरू कर दी गई है। कर्नाटक राज्य खाद्य निगम के प्रबंध निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। चावल गोदामों और वितरण केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सब्सिडी वाले चावल का इस तरह डायवर्जन न केवल गरीब परिवारों को उनके हक से वंचित करता है, बल्कि सरकारी कल्याण योजनाओं में जनता के विश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाता है।
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