चेन्नई , नवंबर 15 -- ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) महासचिव एवं विपक्ष के नेता ईके. पलानीस्वामी ने कोरियाई कंपनी ह्वासुंग के तमिलनाडु छोड़ने तथा राज्य से उद्योगों के हटने की कथित खतरनाक प्रवृत्ति के लिए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को दोषी ठहराया है।
श्री पलानीस्वामी ने यहा एक बयान में कहा कि कोरियाई कंपनी ह्वासुंग का नवीनतम उदाहरण है जिसने पहले तमिलनाडु में निवेश करने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर अपना परिचालन आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया है। द्रमुक की विफल औद्योगिक नीतियों का अपमानजनक अभियोग है। निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की हालिया विदेश यात्राओं का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, "जिन कंपनियों ने कभी निवेश का वादा किया था, वे अब हमसे मुंह मोड़ रही हैं। यह औद्योगिक पलायन केवल द्रमुक के शासन में ही हो रहा है।" उन्होंने तमिलनाडु में कंपनियों के पलायन के कारणों की गहन जांच की मांग की, जिसमें भ्रष्ट कानून और नियमन, कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा का अभाव आदि शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि ह्वासुंग का पीछे हटना कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, कई प्रमुख कंपनियों ने द्रमुक सरकार की अस्थिरता और निवेशकों के विश्वास की कमी के कारण तमिलनाडु की बजाय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक को चुना है। इनमें फॉक्सकॉन भी शामिल है, जिसने तमिलनाडु की कई प्रतिबद्धताओं से पीछे हटते हुए, प्रमुख घटकों और सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं सहित तेलंगाना और कर्नाटक पर ध्यान केंद्रित किया। इसी तरह अमारा राजा बैटरीज़, जिसने तमिलनाडु के बजाय तेलंगाना को अपनी विशाल फैक्ट्री के लिए चुना; लेंसकार्ट, जिसने तेलंगाना में दुनिया की सबसे बड़ी आईवियर निर्माण सुविधा में अपना निवेश स्थानांतरित कर दिया। एथर एनर्जी, जिसने अपनी महत्वपूर्ण विस्तार योजनाओं को कर्नाटक में स्थानांतरित कर दिया।
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