चेन्नई , मार्च 12 -- तमिलनाडु में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर सीटों के बंटवारे पर बातचीत अभी अधूरी है और गठबंधन का नेतृत्व कर रहे एवं मुख्यमंत्री पद का चेहरा अन्नाद्रमुक महासचिव ईके. पलानीस्वामी अपनी रणनीति को बहुत गुप्त रख रहे हैं।
अन्नाद्रमुक सूत्रों के मुताबिक श्री पलानीस्वामी का मुख्य उद्देश्य पार्टी के हितों की रक्षा करना और इतनी सीटों पर चुनाव लड़ना है जो आगामी विधानसभा चुनावों में अपने दम पर बहुमत हासिल करने के लिए आवश्यक हैं।
अन्नाद्रमुक पिछले साल अप्रैल में फिर से राजग में शामिल हो गई थी, लेकिन अभी तक भाजपा के साथ सीटों का बंटवारा अंतिम रूप नहीं ले पाया है। अन्य सहयोगी दल भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं , हालांकि डॉ. अंबुमणि रामदास की पीएमके के साथ समझौता हो चुका है, जिन्हें एक राज्यसभा सीट दी गई है, लेकिन उन्हें कितनी विधानसभा सीटें मिलेंगी, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डेढ़ महीने में तीन बार चुनाव वाले इस राज्य का दौरा कर चुके हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि 01 मार्च को मदुरै में राजग की प्रचार रैली के दौरान समझौता पक्का हो जाएगा, लेकिन उनकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं।
इसके विपरीत द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आईयूएमएल, एमएमके, कांग्रेस और वाइको की एमडीएमके के साथ सीटों का समझौता पूरा कर लिया है। द्रमुक जल्द ही वीसीके और दोनों वाम दलों (भाकपा और माकपा) के साथ भी यह प्रक्रिया पूरी करने वाली है। इसमें नए शामिल हुए दल जैसे प्रेमलता विजयकांत की डीएमडीके और अभिनेता-राजनेता कमल हासन की एमएनएम भी शामिल हैं। द्रमुक गठबंधन में 20 से अधिक दल होने के बावजूद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का कहना है कि कुछ और राजनीतिक दल इस मोर्चे में शामिल हो सकते हैं।
तमिलनाडु के लिए भाजपा के मुख्य रणनीतिकार केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की श्री पलानीस्वामी के साथ कई दौर की बातचीत और श्री पलानीस्वामी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बावजूद अन्नाद्रमुक नेता टस से मस नहीं हो रहे हैं।
अन्नाद्रमुक के सूत्रों का कहना है कि श्री पलानीस्वामी इस बात पर अड़े हैं कि अन्नाद्रमुक कम से कम 160 सीटों पर चुनाव लड़े, ताकि पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल कर सके। इसके विपरीत भाजपा न केवल अपने लिए बड़ा हिस्सा चाहती है, बल्कि अन्य सहयोगियों की सीटों का फैसला करने का अधिकार भी मांग रही है। यह श्री पलानीस्वामी को मंजूर नहीं है क्योंकि इससे अन्नाद्रमुक की स्थिति कमजोर होगी और उनके मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को ठेस पहुंचेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की योजना अन्नाद्रमुक की सीटों को सीमित करने की लग रही है, ताकि चुनाव जीतने की स्थिति में गठबंधन सरकार बन सके। गठबंधन में नए राजनीतिक दलों को शामिल करने पर भी श्री पलानीस्वामी का रुख बहुत नपा-तुला है।
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