मुंबई , जनवरी 26 -- महाराष्ट्र में 'मुंब्रा को हरा रंग से रंगने' वाली टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया, जब महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेताओं की विभाजनकारी बयानबाजी पर कड़ी फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति की बजाय प्रतीकात्मक रंग की राजनीति को प्राथमिकता दी।

श्री नार्वेकर ने मुंब्रा-ठाणे क्षेत्र में हालिया स्थानीय चुनावी जीत के बाद एआईएमआईएम नेताओं द्वारा लगाए गए नारों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक वैधता पहचान-आधारित दिखावे की बजाय राष्ट्र निर्माण में योगदान से हासिल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को किसी भी क्षेत्र या राष्ट्र को रंगने की बात करने से पहले अपनी पहचान और देश को मजबूत करने में निभाई गई अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए।

श्री नार्वेकर का यह हस्तक्षेप एआईएमआईएम के इस दावे के आसपास चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया कि वह अगले पांच सालों में 'मुंब्रा को हरे रंग से रंग देगा।' पार्टी ने हालांकि कहा है कि हरा रंग सिर्फ उसके आधिकारिक झंडे और चुनावी विकास से संबंधित है लेकिन अध्यक्ष ने इन टिप्पणियों को राष्ट्रीय एकता और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को चुनौती देने के बराबर बताया।

उल्लेखनीय है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब एआईएमआईएम नेताओं पार्षद सहर शेख और राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मुंब्रा इलाके में पार्टी के प्रदर्शन का जश्न हरे रंग से जुड़े नारों के साथ मनाया। श्री पठान ने बाद में साफ किया कि ये पंक्तियां लाक्षणिक थीं और सिर्फ पार्टी के विस्तार से संबंधित थीं लेकिन विरोधियों ने इस शब्दावली को भड़काऊ और सांप्रदायिक बताया।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि कोई भी एक रंग किसी एक समुदाय का नहीं होता। उन्होंने रंगों को धार्मिक पहचान से जोड़ने के प्रयासों पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसी बातें महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और राजनीतिक ताने-बाने को बिगाड़ती हैं।

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