फगवाड़ा , अक्टूबर 23 -- पंजाब में फगवाड़ा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) जशनजीत सिंह ने गुरुवार को फगवाड़ा उपमंडल में पराली जलाने पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उपायों की समीक्षा और उन्हें मजबूत करने के लिए विभिन्न विभागों के क्लस्टर अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।

एसडीएम कार्यालय में आयोजित इस बैठक में तहसीलदार फगवाड़ा, खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय (बीडीपीओ) के प्रतिनिधि, कनिष्ठ अभियंता (जेई), खंड जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी, सहकारी समितियों के सहायक रजिस्ट्रार और कृषि अधिकारी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय धान के अवशेषों को जलाने से होने वाले पर्यावरणीय खतरों के बारे में किसानों को जागरूक करना और सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयास करना था।

विचार-विमर्श के दौरान, एसडीएम जशनजीत सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पराली जलाने पर प्रतिबंध के बारे में किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए गांवों में व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अनुपालन सुनिश्चित करने और मृदा स्वास्थ्य एवं वायु गुणवत्ता को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।

एसडीएम ने दोहराया कि पराली जलाने पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर सरकारी नियमों के अनुसार, दो एकड़ तक के खेतों के लिए पांच हजार, दो से पांच एकड़ के लिए 10 हजार और पांच एकड़ से ज़्यादा के खेतों के लिए 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया जायेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित पुलिस थानों में प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।

श्री सिंह ने कृषि विभाग और सहकारी समितियों से आग्रह किया कि वे अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों, जैसे हैप्पी सीडर, मल्चर और बेलर, के इस्तेमाल की सुविधा प्रदान करके किसानों को पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां न केवल प्रदूषण को रोकती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और दीर्घकालिक उत्पादकता को भी बेहतर बनाती हैं।

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