कोलकाता , फरवरी 20 -- भारत चुनाव आयोग (ईसीआई) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच अधिकारियों के निलंबन के दायरे को लेकर फिर से ठन गई है।

राज्य प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक निलंबन का अर्थ सिर्फ संबंधित अधिकारियों को चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त करना है, जिससे वे राज्य सरकार के तहत दूसरे प्रशासनिक भूमिका में बने रह सकें।

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के पद से वाकिफ अधिकारियों ने हालांकि इशारा किया है कि ईसीआई के निर्देश में ऐसे मतलब के लिए बहुत कम जगह है। उनके मुताबिक आयोग ने साफ कर दिया है कि निलंबन का मतलब सिर्फ चुनावी कामों से नहीं बल्कि सभी प्रशासनिक कामों से पूरी तरह हटाना है।

सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने राज्य को दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है।

अधिकारी ने कहा, "सवाल यह उठता है कि अगर अधिकारी प्रशासनिक पद पर बने रहेंगे तो बिना किसी भेदभाव के विभागीय जांच कैसे की जा सकती है। ईसीआई इस बात पर करीब से नजर रख रहा है कि राज्य सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई लेती है या नहीं।"उन्होंने कहा कि राज्य को विभागीय जांच शुरू करने की पुष्टि करने वाली एक रिपोर्ट जमा करनी होगी। अगर ऐसी रिपोर्ट सही समय पर नहीं मिलती है, तो आयोग आगे के कदमों पर विचार करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही राज्य सरकार यह तर्क देती रहे कि निलंबन सिर्फ चुनाव के काम तक ही सीमित है, फिर भी संबंधित अधिकारियों को बाद में और सख्त नतीजों का सामना करना पड़ सकता है।

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